Iran News: होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने से पहले ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं शर्तें, युद्ध खत्म करने की मांग.

Nura Basta14 August 20262 min read81 viewsWorld
Iran News: होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने से पहले ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं शर्तें, युद्ध खत्म करने की मांग.

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और समुद्री व्यापार के लिहाज से एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ ईरान ने महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने से पहले अमेरिका के सामने कई कड़ी शर्तें रख दी हैं। इस बड़े घटनाक्रम के बाद से खाड़ी देशों और वैश्विक बाजारों में हलचल तेज हो गई है क्योंकि इस रास्ते से दुनिया भर का तेल और सामान गुजरता है। ईरानी प्रशासन का यह सख्त रुख सीधे तौर पर अमेरिका और पश्चिमी देशों की नीतियों के खिलाफ है जिससे आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और बढ़ने की पूरी आशंका जताई जा रही है।

मोहम्मद बाकर जुलघद्र का बड़ा बयान

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहम्मद बाकर जुलघद्र ने एक बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी मौजूदा नीतियों में पूरी तरह से बदलाव नहीं करता है, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। उन्होंने यह बात ईरानी सरकारी मीडिया के माध्यम से दुनिया के सामने रखी है और इसे ईरानी जनता की सीधी मांग बताया है। उनका कहना है कि अमेरिकी सरकार को अपने व्यवहार में सुधार लाना होगा तभी इस अहम समुद्री मार्ग को यातायात के लिए बहाल किया जाएगा।

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ईरान की अमेरिका के सामने रखी गईं मुख्य मांगें

ईरानी अधिकारी की तरफ से रखी गई मांगों में कई गंभीर और पुराने विवाद शामिल हैं जिन्हें अमेरिका को पूरा करना होगा। जुलघद्र की प्रमुख मांगों में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को तुरंत हटाना, खाड़ी क्षेत्र से सभी अमेरिकी सैन्य बलों की पूर्ण वापसी और चल रहे युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करना शामिल है। इसके अलावा, ईरान ने इस संघर्ष के दौरान देश को हुए भारी नुकसान की भरपाई करने की मांग भी उठाई है। साथ ही विदेशों के बैंकों में लंबे समय से जमा ईरानी संपत्तियों को बिना किसी रोक-टोक के तुरंत मुक्त करने की बात कही गई है।

व्यापार और टैक्स के मुद्दों पर चुप्पी

दिलचस्प बात यह है कि ईरानी अधिकारी ने अपने इस बयान के दौरान जहाजों के आवागमन और उनसे वसूले जाने वाले टैक्स या शुल्क संबंधी मुद्दों पर कोई भी बात नहीं की है। उनका पूरा ध्यान केवल अमेरिकी सेना की मौजूदगी हटाने, युद्ध रोकने और आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े मामलों पर ही केंद्रित रहा है। इस स्थिति के बने रहने से खाड़ी देशों में सफर करने वाले नाविकों और व्यापारिक जहाजों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

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