Strait of Hormuz Tension: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर साफ किया रुख, अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप

Praggya Singh sabal10 August 20263 min read68 viewsUAE
Strait of Hormuz Tension: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर साफ किया रुख, अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप

तेहरान, ईरान में 10 अगस्त 2026 को एक बड़ा बयान सामने आया है जिसमें विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका की तरफ से शत्रुतापूर्ण कार्रवाई बंद नहीं होती, तब तक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। ईरान का यह कड़ा रुख देश की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल यानी SNSC के विचारों से मेल खाता है, जिससे यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि जब तक अमेरिका ईरान की सभी शर्तों को पूरी तरह से मान नहीं लेता, तब तक इस बेहद जरूरी समुद्री मार्ग को पूरी तरह से नहीं खोला जाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने मीडिया को जानकारी दी कि ईरान तब तक जलमार्ग को नहीं खोलेगा जब तक अमेरिका अपनी पाबंदियों को खत्म नहीं करता, और साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के पास इस जलमार्ग को दोबारा खोलने की मांग करने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं बचा है। ओमान के साथ नए शिपिंग रूट्स को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है, लेकिन विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह के समझौतों का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अमेरिका द्वारा ईरान की चिंताओं को दूर किए बिना जलमार्ग को पूरी तरह से खोल दिया जाएगा।

ईरान की कड़ी शर्तें और अमेरिका के लिए कड़े निर्देश

होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए जो शर्तें तय की गई हैं, उन्हें 8 अगस्त 2026 को मोहम्मद बाकेर ज़ोलघाद्र ने सार्वजनिक किया था जो कि उस समय SNSC के सचिव थे। इन शर्तों में मुख्य रूप से यह मांग शामिल है कि अमेरिका ईरान को धमकाना बंद करे, लेबनान, फलस्तीन, यमन और इराक में ईरान तथा उसके सहयोगियों के खिलाफ युद्ध और आक्रामकता को हमेशा के लिए समाप्त करे, नौसैनिक नाकाबंदी को हटाए और इस क्षेत्र से अपनी सभी सेनाओं को वापस बुला ले। इसके अलावा, ईरान ने यह भी मांग रखी है कि उसे नुकसान के लिए पूरा मुआवजा दिया जाए, सभी कड़े और गैर-कानूनी प्रतिबंधों को तुरंत हटाया जाए और विदेशी बैंकों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को बिना किसी शर्त के वापस किया जाए। देश की संसद के डिप्टी स्पीकर अली निकज़ाद ने भी इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका और इसराइल को इस नए सच को स्वीकार करना ही होगा और इस समुद्री रास्ते को खोलने का कोई भी सैन्य समाधान संभव नहीं है, बल्कि केवल ईरान के सशस्त्र बल ही यह तय करेंगे कि जहाजों के लिए कौन सा रास्ता सही और सुरक्षित होगा।

क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय देशों की प्रतिक्रियाएं

इन बढ़ते तनावों के बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 9 अगस्त को यह संकेत दिया कि अमेरिका इस मामले में धीमी रणनीति अपना रहा है और वह आर्थिक दबाव बनाने को ज्यादा प्राथमिकता दे रहा है। क्षेत्रीय मोर्चे पर एक बड़ी घटना तब घटी जब संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने होर्मुज जलमार्ग से गुजर रहे अपने एक तेल टैंकर पर हुए कथित ईरानी हमले की कड़ी निंदा की और यमन के हूती विद्रोहियों ने मोचा नाम के बंदरगाह शहर पर हमला कर दिया जिससे इस संघर्ष के लाल सागर तक फैलने का खतरा काफी बढ़ गया है। कानूनी पहलुओं की बात करें तो ईरान संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून यानी UNCLOS का सदस्य नहीं है और उसका यही कहना है कि इस जलमार्ग से आवाजाही 'इनोसेंट पैसेज' के नियमों से चलती है, जिसके तहत वह अमेरिका, इसराइल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों को निकलने से रोक सकता है, जबकि अमेरिका और अन्य समुद्री देश 'ट्रांजिट पैसेज' के नियम का समर्थन करते हैं। ईरान की संसद में एक ऐसे प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है जिसके तहत शत्रु देशों से जुड़े जहाजों के आने-जाने पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके और उनसे भारी टोल टैक्स वसूला जा सके, हालांकि समुद्री मामलों के जानकारों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के कदमों से खुले समुद्र में नौकायन की स्वतंत्रता को तगड़ा झटका लग सकता है।

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