Hormuz Strait Tension: ईरान ने फिर दिखाई ताकत, कहा- किसी भी बाहरी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है सेना

फारस की खाड़ी के स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में तनाव एक बार फिर गहराता जा रहा है। 6 अगस्त 2026 को ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल माजिद एब्न-ए-रेज़ा ने एक बड़ा बयान देते हुए साफ किया कि उनकी सेना किसी भी तरह के बाहरी सुरक्षा खतरों का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान की रक्षा तकनीक अब पूरी तरह से घरेलू यानी स्वदेशी है, जो किसी भी दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है।
तनाव की असली वजह क्या है
यह तनातनी तब और बढ़ गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर धमकी दी। उनका कहना था कि अगर इस रास्ते को बहुत जल्द नहीं खोला गया, तो अमेरिका वहां सैन्य हमले कर सकता है। इस क्षेत्र से दुनिया भर का तेल और व्यापारिक जहाजों का आना-जाना होता है, इसलिए यहां उपजा विवाद पूरी दुनिया और खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ANI News के अनुसार, ईरान का रुख इसे लेकर काफी सख्त है।
ईरान की तैयारी और सरकार का दावा
ब्रिगेडियर जनरल माजिद एब्न-ए-रेज़ा ने, जिन्होंने 2 मार्च 2026 को अपना पद संभाला था, अपने संबोधन में कहा कि दुश्मन की ताकत कम हो रही है और ईरान की सेना किसी भी आक्रामकता का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी तंज कसा कि जो देश सुरक्षा के लिए दूसरे देशों की मदद पर निर्भर हैं, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि ईरान की खुद की बनाई हुई तकनीक उनसे कहीं ज्यादा एडवांस और बेहतर है।
वहीं, ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमी-निया ने भी सैन्य तैयारियों की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि उनकी सेना लगातार अपने उपकरणों का आधुनिकीकरण कर रही है, जो सिस्टम खराब हो गए थे उन्हें ठीक किया जा रहा है और घरेलू स्तर पर अपनी क्षमता को लगातार विस्तार दिया जा रहा है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में देश सुरक्षित रहे।
क्या बातचीत से निकलेगा समाधान
जहां अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 5-6 अगस्त के बीच बातचीत में कुछ प्रगति होने का संकेत दिया था, वहीं ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान का कहना है कि अभी बहुत से अहम मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। तेहरान की मुख्य शर्त यह है कि जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी नौसैनिक नाकाबंदी (naval blockade) को नहीं हटाता, तब तक कोई भी समझौता मुमकिन नहीं है। इस नाकाबंदी की वजह से दर्जनों जहाज अपना रास्ता बदलने को मजबूर हुए हैं, जिसका सीधा असर ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ रहा है।