भारत निभा सकता है ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता कराने में अहम भूमिका, ईरानी महावाणिज्य दूत का बड़ा बयान

Sushma Kumari20 August 20262 min read82 viewsIndia
भारत निभा सकता है ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता कराने में अहम भूमिका, ईरानी महावाणिज्य दूत का बड़ा बयान

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए अब कूटनीति के स्तर पर एक नई चर्चा शुरू हो गई है। मुंबई में तैनात ईरान के महावाणिज्य दूत (Consul General) सैयद रज़ा मुसायब मोतलग ने गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में वह पूरी क्षमता है जो ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने और एक सार्थक समझौते तक पहुँचने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर सकता है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए आप ANI News की रिपोर्ट देख सकते हैं।

भारत की शांतिप्रिय छवि पर जोर

भारतीय समयानुसार बातचीत के दौरान ईरानी अधिकारी ने भारत को एक शांतिप्रिय देश बताया जो वैश्विक स्थिरता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि नई दिल्ली अन्य देशों के साथ मिलकर मध्यस्थता की इस प्रक्रिया में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। इससे न केवल संबंधित देशों को बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति, स्थिरता और भाईचारे का माहौल बनाने में मदद मिल सकती है। ईरान का यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब पूरी दुनिया पश्चिम एशिया के हालात पर अपनी नजरें टिकाए हुए है।

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ईरान की बातचीत पर क्या है शर्त

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए ईरानी महावाणिज्य दूत ने स्पष्ट किया कि तेहरान हमेशा से बातचीत के पक्ष में रहा है और इसके लिए वह पूरी तरह तैयार है। हालांकि, शर्त यह है कि बातचीत पूरी तरह से सार्थक और उत्पादक होनी चाहिए। उन्होंने अमेरिका की पिछली भागीदारी पर सवाल उठाते हुए उसे अवसरवादी करार दिया और आरोप लगाया कि वाशिंगटन अक्सर बैठकों का इस्तेमाल केवल अपनी आक्रामकता को बढ़ाने के लिए एक बहाने के तौर पर करता है। उनके अनुसार, किसी भी प्रकार की सार्थक वार्ता शुरू होने से पहले अमेरिका को क्षेत्र में अपनी अस्थिर करने वाली गतिविधियों को तुरंत रोकना होगा। इस बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए ANI News पर विजिट करें।

अमेरिकी आर्थिक रणनीति पर तीखी प्रतिक्रिया

हालिया भू-राजनीतिक तनावों का जिक्र करते हुए ईरानी अधिकारी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रूप की नवीनतम आर्थिक रणनीति, जिसे 'इकोनॉमिक डी-डे' नाम दिया गया है, की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस कदम को अमेरिका की कमजोरी की निशानी बताया। इसके साथ ही, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी इस बात पर जोर दिया कि प्रतिबंधों को कितना भी तेज क्यों न कर दिया जाए, तेहरान कभी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि यह अभियान केवल घरेलू अमेरिकी आर्थिक संघर्षों से ध्यान भटकाने का एक तरीका मात्र है और ईरान किसी भी तरह के दबाव में आकर बातचीत की मेज पर नहीं बैठेगा।

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