ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा, इस्लामाबाद समझौता हुआ बेअसर, 60 दिन की समय सीमा हुई खत्म।

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य अभियानों को हमेशा के लिए रोकने के लिए जो इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी MoU साइन हुआ था, उसकी 60-दिन की समय सीमा आधिकारिक रूप से 17 अगस्त 2026 को पूरी हो गई है। इस तय समय के अंदर दोनों देशों के बीच न तो कोई औपचारिक समझौता हुआ और न ही इस डील को आगे बढ़ाया गया। इस पूरे मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का माहौल फिर से गहराने लगा है।
ईरान के विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने इस 60-दिन की अवधि के महत्व को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह समय सीमा अब पूरी तरह से बेकार और अप्रासंगिक हो चुकी है। प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने यह भी आरोप लगाया कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने शुरुआत से ही इस समझौते का उल्लंघन किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान की राष्ट्रीय नीति किसी भी बाहरी डेडलाइन के हिसाब से नहीं चलती, बल्कि देश के आंतरिक हितों को सबसे पहले रखती है।
पाकिस्तान की कोशिशें और अमेरिका का रुख
आपको बता दें कि इस समझौते को कराने में पाकिस्तान ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई थी और पाकिस्तान लगातार यह कोशिश कर रहा था कि इस डील को आगे भी लागू रखा जाए। हालांकि, अमेरिका का रुख इसके बिल्कुल विपरीत रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समुद्री विवादों के चलते पहले ही 8 जुलाई 2026 को इस समझौते को खत्म मान लिया था। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने पहले साफ किया था कि यह समझौता युद्ध को खत्म करने के लिए था, न कि कोई साधारण संघर्ष विराम जिसे बार-बार बढ़ाने की जरूरत पड़े। फारस की खाड़ी का होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी तनाव का मुख्य केंद्र बना हुआ है और दोनों देश लगातार एक-दूसरे पर प्रतिबंध और धमकियां दे रहे हैं।