अमेरिका और ईरान के बीच समझौता खत्म, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ा तनाव और फंसा शिपिंग रूट.

अमेरिका और ईरान के बीच हुआ 60-दिन का समझौता बिना किसी अंतिम नतीजे के समाप्त हो गया है। यह समझौता इस साल 17 जून 2026 को शुरू हुआ था जिसका मुख्य उद्देश्य युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य और नेवल नाकाबंदी से जुड़े मामलों पर बातचीत करना था। लेकिन 17 अगस्त 2026 को इसकी समय सीमा खत्म हो गई और दोनों देश किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच पाए। इस स्थिति के चलते खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और सफर करने वालों के बीच चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इसका सीधा असर समुद्री व्यापार और सुरक्षा पर पड़ रहा है।
ईरान का बयान और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण
ईरान के विदेश मंत्री Seyyid Abbas Araghchi ने साफ कहा कि अमेरिका की गलत गणनाओं की वजह से यह विवाद हल नहीं हो सका। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका देश फिलहाल औपचारिक बातचीत को दोबारा शुरू करने की कोई योजना नहीं बना रहा है। इसके साथ ही ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने एक बार फिर दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर केवल ईरान का संप्रभु नियंत्रण रहेगा और यह रणनीतिक जलमार्ग पूरी तरह से ईरानी कमान के तहत ही संचालित किया जाएगा। इस बयान के बाद से क्षेत्र में तनाव का माहौल और ज्यादा गहरा गया है।
समझौते की अवधि समाप्त होने से पहले ही सैन्य स्तर पर काफी हलचल देखने को मिली थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी कर्मियों को लेकर कुछ धमकियों और उत्तरी इराक में कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार के कार्यालय पर ड्रोन हमलों जैसी घटनाएं सामने आईं। हालांकि कतर और पाकिस्तान इस मामले में मध्यस्थता की कोशिश लगातार कर रहे हैं, लेकिन ईरान ने इन मुलाकातों को औपचारिक बातचीत मानने से इनकार कर दिया है। इसके बावजूद, ईरान ओमान के साथ अपने स्तर पर अलग से शिपिंग समझौते करने में लगा हुआ है ताकि व्यापार सुचारू रूप से चल सके।
अमेरिका का कड़ा रुख और शिपिंग पर असर
दूसरी तरफ अमेरिका ने भी अपने कड़े रुख में कोई नरमी नहीं बरती है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पिछले महीने ही इस मेमोरेंडम को आधिकारिक तौर पर बंद घोषित कर दिया था और होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र के रूप में दावा करने की अपनी मंशा को फिर से दोहराया था। इन राजनीतिक और सैन्य खींचतान के कारण इस क्षेत्र से होने वाली शिपिंग पूरी तरह से प्रभावित हो गई है। यूएई ने हाल ही में एADNOC से जुड़े जहाजों पर हमलों की सूचना दी है, जिससे आने वाले दिनों में कूटनीति के जरिए शांति बहाल होने का रास्ता बेहद अनिश्चित नजर आ रहा है। खाड़ी क्षेत्र में हो रही इन घटनाओं का असर उन प्रवासी भारतीयों पर भी पड़ रहा है जो काम के सिलसिले में इन रास्तों से जुड़े हैं या जिनकी आजीविका समुद्री व्यापार पर निर्भर है।