Iran पर अमेरिका का बड़ा आर्थिक हमला, US के डिप्टी विदेश मंत्री पर भड़का ईरान, जानिए क्या है पूरा मामला.

खाड़ी देशों में तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने अमेरिका पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिकी प्रशासन अपनी विफल रणनीतियों के बाद अब अपने सहयोगियों से मदद की भीख मांग रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 20 अगस्त 2026 को यह बात कही और स्पष्ट किया कि ईरान के हारने का दावा करने वाले अमेरिका को खुद अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार लगानी पड़ रही है।
अमेरिका का आर्थिक डी-डे और ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में ईरान के खिलाफ एक बेहद सख्त और भारी आर्थिक कार्रवाई की घोषणा की है, जिसे उन्होंने ECONOMIC D-DAY का नाम दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया भर के देशों को साफ चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार, वित्तीय सेवाओं या किसी भी तरह की लॉजिस्टिक सहायता में शामिल होगा, उसे भयंकर आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप का दावा है कि ईरान की वायु और नौसेना की ताकत को पूरी तरह से खत्म किया जा चुका है, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz अमेरिकी नियंत्रण में खुला और चालू है।
दूसरी तरफ, ईरानी उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य हमेशा से ईरान का रहा है, आज भी ईरान का है और आगे भी ईरान का ही रहेगा। इस रास्ते से आने-जाने का फैसला पूरी तरह से तेहरान सरकार ही तय करेगी।
ईरान के मंत्रियों और अधिकारियों का कड़ा रुख
इस पूरे मामले पर ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिकी रणनीति को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने ट्रंप की इस नीति को आर्थिक आतंकवाद करार दिया और कहा कि यह अमेरिका की घरेलू आर्थिक समस्याओं और बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज से जनता का ध्यान भटकाने की एक चाल मात्र है। इसके अलावा, ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ Ali Abdollahi ने खाड़ी देशों के पड़ोसियों को भी सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी पड़ोसी देश ने अमेरिकी सैन्य अभियानों में मदद की, तो इसे सीधे तौर पर संघर्ष में शामिल होना माना जाएगा।
क्षेत्रीय हालात तब और ज्यादा बिगड़ गए जब संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने ईरान के साथ अपने सभी व्यापारिक और वित्तीय लेन-देन को अस्थायी रूप से रोक दिया। यह फैसला 18 अगस्त 2026 को हुए कथित मिसाइल हमलों के बाद लिया गया था, हालांकि तेहरान ने इन हमलों में किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इनकार किया है।
सेंटर फॉर स्ट्रैटिजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के रक्षा विशेषज्ञ Mark Cancian का कहना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात पूरी तरह से आर्थिक घिसाव की लड़ाई में बदल चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस समय इस्लामिक गणराज्य ईरान के साथ किसी भी प्रकार की कूटनीतिक बातचीत या तो शुरू नहीं हुई है और ना ही कोई ऐसी बैठक तय की गई है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों के लिए इस बढ़ते तनाव ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि हर गतिविधि पर सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर बनी हुई है।