अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी, ओमान की मध्यस्थता से होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता निकालने की कोशिश में तेहरान

अमेरिका के साथ इस साल फरवरी से चले आ रहे तनाव के बीच ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बीच का रास्ता निकालने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। तेहरान और वाशिंगटन के बीच चल रही इस तनातनी के बीच ईरान ने उम्मीद जताई है कि ओमान के साथ चल रही बातचीत से कुछ सकारात्मक परिणाम जरूर सामने आएंगे। हालांकि, दूसरी तरफ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खोलने के लिए अपनी पुरानी शर्तों को एक बार फिर से दोहराया है, जबकि अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह ईरान पर अपना दबाव लगातार बनाए रखेगा और किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
ओमान के साथ बातचीत और ईरान की उम्मीदें
अल जजीरा, फॉक्स न्यूज और सीबीएस न्यूज से मिली रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने उम्मीद जताई है कि ओमान की मध्यस्थता से होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा विवाद सुलझ सकता है। बातचीत के दौरान उन्होंने किसी भी तरह के युद्ध या शांति के बीच की स्थिति से आगे बढ़ने का आह्वान किया है। वहीं, ईरान के विदेशमंत्री अब्बास अरागची ने पत्रकारों को जानकारी दी कि ओमान के साथ होर्मुज में एक अस्थायी रास्ता बनाने को लेकर सहमति लगभग तय हो चुकी है। हालांकि, इस जलडमरूमध्य को पूरी तरह से फिर से खोलने के लिए कुछ शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा, जिसमें युद्ध से हुए नुकसान के लिए अमेरिका द्वारा मुआवजा देना भी शामिल है।
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की कड़ी शर्तें
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इस मामले में अपनी कुछ कड़े नियम और शर्तें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से यह मांग की गई है कि अमेरिका ईरान को धमकाना पूरी तरह से बंद करे और साथ ही ईरान तथा उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई को तुरंत रोका जाए। इसके अलावा, अमेरिका को अपनी नौसैनिक नाकाबंदी को हटाना होगा, संघर्ष के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा देना होगा, सभी प्रकार के प्रतिबंधों को हटाना होगा और ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति को तुरंत बहाल करना होगा। दूसरी तरफ, IRGC का साफ कहना है कि जलमार्ग तभी खोला जा सकता है जब अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी को समाप्त कर दे और युद्ध के नुकसान का मुआवजा दे।
अमेरिका का कड़ा रुख और ओमान की भूमिका
इस पूरी बातचीत के दौरान ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है, हालांकि ओमान ने इसके लिए अभी तक किसी भी देश पर सीधे तौर पर कोई दोष नहीं मढ़ा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने खुलकर यह आरोप लगाया है कि ईरान आपसी संबंधों में सुधार करने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है, इसलिए वाशिंगटन उस पर लगातार दबाव बनाना जारी रखेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति वेंस ने यह भी दावा किया कि उन्होंने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और उनकी पारंपरिक तथा गैरपारंपरिक सैन्य क्षमताओं को काफी हद तक खत्म या कम कर दिया है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, होर्मुज में उनकी नाकाबंदी की वजह से कुल 53 जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है, हालांकि अमेरिकी मध्य कमान ने यह भी स्पष्ट किया कि इस दौरान मानवीय सहायता लेकर जा रहे 30 से ज्यादा जहाजों को पूरी सुरक्षा के साथ वहां से गुजरने की अनुमति दी गई थी।