Iran News: ईरान के उपराष्ट्रपति का बड़ा बयान, कहा अमेरिका और इसराइल देश को करना चाहते हैं तबाह

Sushma Kumari17 August 20262 min read66 viewsWorld
Iran News: ईरान के उपराष्ट्रपति का बड़ा बयान, कहा अमेरिका और इसराइल देश को करना चाहते हैं तबाह

ईरान के पहले उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा अरेफ ने 17 अगस्त 2026 को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिका और इसराइल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ये बाहरी देश आर्थिक और सामाजिक दबाव बनाकर ईरान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। बाजार विनियमन मुख्यालय की एक बैठक के दौरान उन्होंने साफ किया कि हाल ही में मिली सैन्य असफलताओं के बाद ये देश इस तरह की नीच चालें चल रहे हैं। उनका कहना था कि ये दुश्मन देश देश के अंदर की आर्थिक परेशानियों का फायदा उठाकर आम जनता में गुस्सा भड़काना चाहते हैं ताकि देश की सरकार को परेशान किया जा सके।

बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट पर सरकार की नजर

मोहम्मद रज़ा अरेफ ने इस बात को खुले तौर पर माना कि देश के अंदर चीजों के दाम बहुत ज्यादा बढ़ चुके हैं जो चिंता का विषय बन गया है। ईरान इस समय कई तरह की आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है जिसमें कम होती तेल की कमाई और विदेशों से सामान मंगाने में आ रहा ज्यादा खर्च शामिल है। इन सभी परेशानियों की वजह से आम आदमी की जेब पर बहुत भारी असर पड़ रहा है और रोजमर्रा की चीजें खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। देश की जनता बढ़ती महंगाई से परेशान है और सरकार इस बात को अच्छी तरह समझ रही है कि हालात काबू से बाहर हो रहे हैं।

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सरकार का सख्त एक्शन और बाजार पर निगरानी

बढ़ती कीमतों और जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए ईरानी सरकार ने अब कड़े कदम उठाने का फैसला किया है। सरकार ने आदेश दिया है कि बाजारों की निगरानी बहुत तेजी से बढ़ाई जाए ताकि कोई भी दुकानदार या व्यापारी सामान की कालाबाजारी या ज्यादा मुनाफाखोरी न कर सके। जो लोग भी चीजों को छुपाकर दाम बढ़ाएंगे उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का यह कदम जनता को राहत देने के लिए उठाया गया है ताकि बाजार में जरूरी सामान सही कीमत पर मिलता रहे और लोगों को किसी प्रकार की बड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े।

राहत और कड़े कूटनीतिक फैसले

यह पूरा मामला ऐसे समय पर सामने आया है जब अमेरिका के साथ शांति वार्ताओं को लेकर बना 60 दिन का समझौता खत्म हो चुका है। इस समझौते के खत्म होने के बाद अब ईरान ने अपनी सुरक्षा और कूटनीतिक नीतियों को और ज्यादा सख्त कर लिया है। क्षेत्रीय तनाव के इस दौर में सरकार का पूरा ध्यान देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और बाहरी ताकतों की चालों को नाकाम करने पर है। अधिकारियों का मानना है कि देश की जनता को इन बाहरी साजिशों के खिलाफ एकजुट रहना होगा ताकि देश की अर्थव्यवस्था को और नुकसान से बचाया जा सके।

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