इरबिल में ड्रोन हमला, ईरान ने कहा रिश्तों को बिगाड़ने की हो रही साजिश, अमेरिका और यूएई ने की निंदा।

इरबिल में हुए ताजा ड्रोन हमले के बाद राजनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है और अधिकारियों ने इस पर चिंता जताई है। यह घटना 17 अगस्त 2026 को हुई थी जब दो खतरनाक ड्रोन से हमला किया गया था। इस हमले में कुर्दिश प्रधानमंत्री मंसूर बारजानी के कार्यालय और क्षेत्रीय खुफिया प्रमुख के आवास को निशाना बनाया गया था। कुर्दिश आतंकवाद विरोधी यूनिट ने दावा किया था कि इन ड्रोन्स को ईरान की सीमा से लॉन्च किया गया था, लेकिन ईरान सरकार ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है। इस पूरी घटना के बाद से क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं और आम लोगों के बीच भी तनाव का माहौल देखा जा रहा है।
घटना के बाद नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं
कुर्दिश प्रधानमंत्री मंसूर बारजानी ने इस घटना को बहुत ही गैर-जिम्मेदाराना और अस्वीकार्य करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह सीधा हमला क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बहुत बड़ा खतरा है। राष्ट्रपति नेचिरवान बारजानी ने भी इस बात का समर्थन किया और इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि यह तेहरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव का एक खतरनाक विस्तार है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने ड्रोन्स के असली सोर्स का पता लगाने के लिए एक जांच कमेटी का गठन कर दिया है। इसके अलावा इराकी विदेश मंत्री फुद हुसैन ने तेहरान से इस मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा है और चेतावनी दी है कि यह घटना एक खतरनाक परंपरा की शुरुआत कर रही है।
ईरान का पक्ष और अंतरराष्ट्रीय चिंता
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने इन रिपोर्ट्स पर हैरानी जताई है और कुर्दिश अधिकारियों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के झूठे षड्यंत्र से सावधान रहें। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद संदिग्ध बताया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान दोनों पक्षों के बीच भाईचारे के रिश्तों को सुरक्षित रखना चाहता है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस हमले की कड़ी निंदा की जा रही है। इराक में अमेरिका के विशेष दूत टॉम बराक ने इस कृत्य को एक अस्वीकार्य खतरा बताया है। वहीं, यूएई के विदेश मंत्रालय ने भी इसे इराक की संप्रभुता का खुला उल्लंघन करार दिया है। इस तरह की घटनाओं से खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और काम करने वाले प्रवासियों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं क्योंकि क्षेत्रीय तनाव का असर अक्सर आम जनजीवन पर पड़ता है।