Iran की कड़ी चेतावनी, अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों में शामिल होने वाले देशों को ईरान ने बताया दुश्मन.

ईरान ने अमेरिका के नए आर्थिक प्रतिबंधों और दबाव की मुहिम में शामिल होने वाले देशों को लेकर बहुत कड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान ने साफ कर दिया है कि जो भी देश वाशिंगटन के साथ मिलकर इस अभियान का हिस्सा बनेंगे, उन्हें ईरान का सीधा दुश्मन माना जाएगा। 22 अगस्त 2026 को ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसेन रेजाई ने सरकारी टेलीविजन पर यह बयान दिया और दुनिया के सामने अपनी बात रखी।
मोहसेन रेजाई ने अपने बयान में कहा कि जो देश ईरान के खिलाफ इस आर्थिक युद्ध का समर्थन करेंगे, उनके हितों को ईरान की तरफ से निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर पड़ोसी देश इस अमेरिकी मुहिम का हिस्सा बनते हैं, तो ईरान फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले तेल शिपमेंट को पूरी तरह से रोक देगा। इसके अलावा, ईरान अन्य तेल निर्यात मार्गों पर भी हमले करने से पीछे नहीं हटेगा।
अमेरिका और उसके सहयोगियों पर कड़ा रुख
ईरान ने अभी तक सीधे तौर पर अमेरिकी आर्थिक हितों पर हमले नहीं किए हैं, लेकिन मोहसेन रेजाई ने याद दिलाया कि ईरान के पास क्षेत्र और विदेश में मौजूद अमेरिकी तेल और आर्थिक कंपनियों को निशाना बनाने की पूरी क्षमता है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रैन के संभावित कदमों को एक बड़े टकराव की शुरुआत बताया और इस स्थिति को भूकंप की तरह खतरनाक करार दिया।
यह तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट के नेतृत्व में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के खिलाफ इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध तैयार करने की बात कही। अमेरिकी प्रशासन का यह कदम ईरान को पूरी तरह से आर्थिक रूप से घेरने और अलग-थलग करने के लिए उठाया जा रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस अमेरिकी पहल को युद्ध की घोषणा और देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।
सैन्य तैयारी और तेल शिपमेंट पर असर
ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ अली अब्दुल्लाही ने भी इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि ईरानी सेना किसी भी नए खतरे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और वे देश की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाएंगे। इस बढ़ते तनाव की वजह से फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल शिपमेंट लगभग ठप हो चुके हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि बिना अनुमति के आने वाले किसी भी टैंकर को रोका जाएगा।
दूसरी तरफ, इन तमाम अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच ईरान की अपनी अर्थव्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। देश में महंगाई दर के इस साल के अंत तक 70% के करीब पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, जबकि आर्थिक उत्पादन में 5% से ज्यादा की गिरावट आने का अनुमान लगाया गया है। इस स्थिति से आम जीवन पर भी गहरा असर पड़ रहा है और आने वाले दिनों में हालात और भी ज्यादा तनावपूर्ण हो सकते हैं।