Iran News: Bandar Abbas के मछुआरे महीनों बाद लौटे समंदर में, संघर्ष के बीच रोजी-रोटी की बड़ी जंग.

ईरान के बंदर अब्बास शहर के मछुआरों ने कई महीनों के संघर्ष और तनाव के बाद आखिरकार Strait of Hormuz के पानी में वापसी कर ली है। युद्ध जैसे हालात के कारण ये लोग पिछले तीन महीनों से ज्यादा समय से समंदर में नहीं जा पा रहे थे और तट पर ही रहने को मजबूर थे। इस संबंध में Al Jazeera English ने August 18, 2026 को रिपोर्ट दी थी, जिससे स्थानीय समुद्री समुदाय की मुश्किलों और उनकी वापसी की स्थिति पर रोशनी पड़ी है। हालांकि काम दोबारा शुरू हो गया है, लेकिन मछुआरों के सामने अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए अभी भी बहुत बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं।
समुद्र में खतरे और नुकसान का सामना
संघर्ष के दौरान समंदर का माहौल बेहद खतरनाक हो चुका है। पानी में टूटी हुई नावें, फटे हुए जाल और तमाम तरह का मलबा बिखरा पड़ा है। इन भौतिक बाधाओं के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास रोजाना की मछली पकड़ने की गतिविधियां बेहद जटिल हो गई हैं। मछुआरे अपनी जान जोखिम में डालकर काम पर लौट रहे हैं क्योंकि उनके पास इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।
मछुआरों से जुड़ी जानकारी के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच चले भीषण संघर्ष के कारण करीब तीन महीने से ज्यादा समय तक काम पूरी तरह बंद रहा। गहन लड़ाई लगभग 40 दिन तक चली, जिसके बाद छिटपुट झड़पें होती रहीं, हालांकि April 8 को एक संघर्षविराम समझौता भी हुआ था। इसके बाद July 14, 2026 को अमेरिकी बलों ने ईरानी बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले जहाजों पर फिर से नाकाबंदी लागू कर दी थी।
मਛुआरों का दर्द और आधिकारिक बयान
47 साल के एक मछुआरे Mohammad Amin ने बताया कि वह तीन महीने से ज्यादा समय तक बेकार बैठने के बाद समंदर में लौटे हैं। उन्होंने कहा कि अगर वे काम नहीं करेंगे तो भूख से मर जाएंगे और उनके तीन बच्चे हैं। वहीं, 53 साल के दूसरे मछुआरे Hossein ने बताया कि संघर्ष के दौरान बंदर अब्बास का waterfront बार-बार हमलों का शिकार हुआ, लेकिन हालात थोड़े सामान्य होते ही वे समंदर में उतर गए। उनका कहना था कि उनके पास वापस जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था क्योंकि काम न करने पर पैसे कहां से आते। इसके अलावा, बाघा अब्बासजादेह ने भी लड़ाई के दोबारा भड़कने को लेकर चिंता जताई है।
दूसरी ओर, आधिकारिक मोर्चे पर तनाव लगातार बना हुआ है। ईरान का कहना है कि वह स्ट्रेट ऑफ Hormuz पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा और वहां से गुजरने वाले जहाजों को अनुमति लेनी होगी तथा ट्रांजिट सर्विस फीस चुकानी होगी। वाशिंगटन और कई क्षेत्रीय देश इस रुख का विरोध कर रहे हैं। ईरानी संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार Mohammad Baqer Qalibaf ने August 18, 2026 को स्पष्ट किया कि जब तक अमेरिका समुद्री नाकाबंदी और प्रतिबंध हटाने के साथ-साथ ईरान की जमी हुई संपत्ति को मुक्त करने जैसी अंतरिम सौदे की शर्तों को पूरा नहीं करता, तब तक यह जलडमरूमध्य बंद रहेगा।
बंदरगाहों और समुद्री यातायात पर असर
तनाव के इस दौर में समुद्री व्यापार और नौकायन को भी भारी नुकसान हुआ है। United Kingdom Maritime Trade Operations (UKMTO) ने August 18, 2026 को जानकारी दी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बाहर जाते समय एक जहाज अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आ गया, जिससे उसके इंजन रूम को नुकसान पहुंचा और एक नाविक हताहत हुआ। ओमान का तटरक्षक बल शेष चालक दल की सहायता कर रहा है।
इस पूरे संघर्ष और नाकाबंदी के कारण बंदर अब्बास और आसपास के दक्षिणी द्वीपों पर करीब एक दर्जन मछुआरे मारे गए, जबकि पड़ोसी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के 17 मछुआरे लापता हो गए। दक्षिणी हॉर्मोजगन प्रांत के 2,000 से अधिक मछुआरों का मछली पकड़ने का उपकरण नष्ट हो गया और सैकड़ों मछली पकड़ने वाली तथा व्यापारिक नावें क्षतिग्रस्त हो गईं। ईरान युद्ध शुरू होने से पहले प्रतिदिन लगभग 138 जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, लेकिन अब यातायात सिंगल डिजिट में सिमट गया है। संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के प्रमुख के अनुसार, फारस की खाड़ी में लगभग 1,500 जहाज और 20,000 नाविक फंसे हुए हैं, जिससे यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।