जुलाई में ईरान से जुड़े हैकर्स ने ब्रिटेन के पावर प्लांट और अमेरिका के वॉटर इन्फ्रास्ट्रक्चर को बनाया निशाना.

जुলাই 2026 में ईरान से जुड़े हैकर्स ने एक बड़े साइबर हमले को अंजाम दिया, जिसमें ब्रिटेन के एक छोटे पावर प्लांट को चार दिनों तक ठप कर दिया गया। इस घटना ने पूरी दुनिया में डिजिटल सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। ब्रिटेन सरकार ने इस सेंधमारी की पुष्टि करते हुए बताया कि प्लांट का आकार छोटा होने के कारण देश की बिजली आपूर्ति पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ा, लेकिन यह इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हुआ एक अभूतपूर्व हमला है।
ब्रिटेन और अमेरिका में एक साथ हुआ डिजिटल हमला
इस पूरी घटना की जानकारी तुरंत National Cyber Security Centre को दी गई, जो GCHQ का ही एक हिस्सा है। हालांकि, अधिकारियों ने इस मामले पर ज्यादा जानकारी देने से मना किया है और ऊर्जा कंपनियों के साथ मिलकर सुरक्षा को मजबूत करने में जुट गए हैं। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिका के 12 राज्यों में पानी और सीवेज सिस्टम पर भी समन्वित साइबर हमले किए गए। इन राज्यों में Minnesota, Michigan, Georgia, South Dakota और New Jersey शामिल हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इन हमलों में इंटरनेट से जुड़े प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर्स यानी PLCs को खास तौर पर निशाना बनाया गया। इस सिलसिले में 30 जुलाई 2026 को FBI ने एक पब्लिक सर्विस अनाउंसमेंट जारी किया था। इस चेतावनी में बताया गया कि शातिर लोग Rockwell Automation और Allen-Bradley जैसे ब्रांड्स के ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी उपकरणों को निशाना बना रहे हैं ताकि कामकाज में रुकावट पैदा की जा सके। इस बारे में अधिक जानकारी आप FBI की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।
पीने के पानी की सप्लाई सुरक्षित
अमेरिका में हुए इन हमलों की वजह से कुछ स्थानीय परेशानियां जरूर सामने आईं, जैसे पानी के दबाव में कमी और हल्की बाढ़ जैसी स्थिति। हालांकि, अधिकारियों ने साफ कर दिया कि आम लोगों के पीने के पानी की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है और उसपर कोई आंच नहीं आई है। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी और Cybersecurity & Infrastructure Security Agency ने सभी प्लांट मैनेजरों को निर्देश दिया है कि वे अपने इंडस्ट्रियल कंट्रोल सिस्टम को तुरंत इंटरनेट से अलग कर लें और लॉगिन के लिए कड़े नियमों का पालन करें। इसके बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए CISA की एडवाइजरी को देखा जा सकता है।
सुरक्षा विश्लेषकों ने इस बात की आशंका जताई है कि पानी के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हुए इन हमलों के पीछे 'CyberAv3ngers' नाम का ग्रुप हो सकता है। यह ग्रुप इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स साइबर-इलेक्ट्रॉनिक कमांड के तहत काम करता है। इस तरह के खतरनाक और सोफिस्टिकेटेड साइबर हमलों को लेकर व्हाइट हाउस ने भी गहरी चिंता जताई है, जबकि ब्रिटेन और अमेरिका के अधिकारी लगातार इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं।