इसराइल पर मंडराया आर्थिक संकट, बढ़ते कर्ज और विदेश जाने वाले लोगों से देश की हालत हुई खराब.

Sushma Kumari23 August 20263 min read75 viewsWorld
इसराइल पर मंडराया आर्थिक संकट, बढ़ते कर्ज और विदेश जाने वाले लोगों से देश की हालत हुई खराब.

इस समय इसराइल के राजनेता विदेशी सुरक्षा खतरों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जिसमें गाजा और दक्षिणी लेबनान का संघर्ष शामिल है। देश के नेता ईरान के साथ चल रहे तनाव से निपटने में लगे हुए हैं, जबकि दूसरी तरफ देश के भीतर एक बहुत बड़ा वित्तीय संकट पैदा हो गया है। सरकार का पूरा ध्यान बाहरी लड़ाइयों पर है और देश की अंदरूनी आर्थिक हालत लगातार खराब होती जा रही है।

बड़ी संख्या में देश छोड़कर जा रहे हैं अमीर लोग

रिपोर्ट के मुताबिक इसराइल में उच्च वेतन वाले प्रोफेशनल्स का देश छोड़कर जाने का सिलसिला तेज हो गया है। तेल अवीव यूनिवर्सिटी की एक स्टडी से यह बात सामने आई है कि 2023 से 2025 के बीच लगभग 270,000 इसराइली नागरिकों ने कम से कम तीन लगातार महीनों के लिए देश छोड़ा है। पिछले 15 सालों में यह सबसे बड़ा पलायन है। यह ट्रेंड खासकर उन लोगों में ज्यादा देखा जा रहा है जो बहुत ज्यादा पैसा कमाते हैं। टॉप 10% इनकम कमाने वालों का विदेश जाने का रेट 2024 में 80% बढ़कर 0.5% से ज्यादा हो गया है। इसके अलावा 40-50 साल की उम्र के लोगों में विदेश जाने की संख्या 60% बढ़ी है और हाई-टेक तथा स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कामगारों के जाने में 150% और 100% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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देश के टैक्स कलेक्शन पर पड़ा असर

पढ़े-लिखे और अमीर लोगों के देश छोड़ने की वजह से देश की कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है। इसराइल में टॉप 20% कमाने वाले लोग देश के कुल इनकम टैक्स का 92% हिस्सा देते हैं। वहीं टेक सेक्टर देश की जीडीपी का पांचवां हिस्सा और सैलरी पर लगने वाले टैक्स का एक तिहाई हिस्सा देता है। विदेश जाने वाले लोगों की वजह से टैक्स में होने वाला नुकसान 2019 से पहले करीब 500 मिलियन शेकेल यानी $166 मिलियन था, जो 2023 और 2024 में बढ़कर 1.2 बिलियन शेकेल यानी $400 मिलियन हो गया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले पांच सालों में यह नुकसान सालाना 3.5 बिलियन शेकेल यानी $1.16 बिलियन तक पहुंच जाएगा। इस बढ़ती समस्या को देखते हुए विपक्ष के नेताओं ने 3 अगस्त 2026 को इसे एक रणनीतिक खतरा बताया था।

बढ़ता राष्ट्रीय कर्ज और वित्तीय स्थिति

एक तरफ देश से लोग जा रहे हैं तो दूसरी तरफ इसराइल की आर्थिक स्थिति भी बहुत कमजोर होती जा रही है। 16 अगस्त 2026 तक देश का कुल कर्ज बढ़कर 1.37 ट्रिलियन शेकेल यानी लगभग $370 बिलियन पहुंच गया है। ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स का अनुमान है कि 2026 के अंत तक कर्ज और जीडीपी का अनुपात बढ़कर 76% हो जाएगा, जो 2024 में 68.48% था। हालांकि फरवरी 2026 में इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड यानी IMF ने कहा था कि 2026 के लिए तय किया गया 3.9% का घाटे का लक्ष्य सार्वजनिक कर्ज को कम करने के लिए काफी नहीं है, फिर भी जून 2026 को खत्म हुए 12 महीनों के दौरान इसराइल का वित्तीय घाटा कम होकर 3.3% पर आ गया। जून के महीने में सरकार को 45.7 बिलियन शेकेल का राजस्व मिला और जुलाई 2026 में टैक्स कलेक्शन में पिछले साल की तुलना में 12% की बढ़ोतरी हुई। इसके बावजूद सरकारी खर्च, खासतौर से रक्षा खर्च में 8.7% की वृद्धि होना आने वाले समय में स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है।

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