Israel-Gaza War: इसराइल और गाजा का युद्ध बना सबसे महंगा, खर्च हुए 1.36 लाख करोड़ रुपये और हिंसा अभी भी जारी.

Sushma Kumari16 August 20262 min read73 viewsWorld
Israel-Gaza War: इसराइल और गाजा का युद्ध बना सबसे महंगा, खर्च हुए 1.36 लाख करोड़ रुपये और हिंसा अभी भी जारी.

इसराइल और गाजा के बीच चल रहा संघर्ष इसराइल के इतिहास का सबसे लंबा और सबसे महंगा सैन्य अभियान बन गया है। 7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुई इस लड़ाई में अब तक लगभग 420 बिलियन शेकेल यानी 136 अरब डॉलर (लगभग 1.36 लाख करोड़ रुपये) का भारी भरकम खर्च आ चुका है। इस युद्ध की मार आम लोगों पर बहुत भारी पड़ी है और लगातार होते हमलों के कारण स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। युद्ध रोकने के लिए हालांकि पहले समझौते की बात हुई थी, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं और हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है।

इसराइल के हमलों में लगातार हो रहा नुकसान

हाल ही में 16 अगस्त 2026 को इस्राइली हवाई हमलों और गोलीबारी के कारण गाजा पट्टी में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई। मारे गए व्यक्ति की पहचान नुसीरात कैंप के रहने वाले मोहम्मद बशीर अबू अरमाना के रूप में हुई है और इस हमले में 7 लोग घायल भी हुए हैं। इसके अलावा गाजा सिविल डिफेंस की टीमों ने 15 अगस्त को तबाह हुए घरों के मलबे से 21 शव बरामद किए। इन ताजा आंकड़ों को मिलाने के बाद संघर्ष की शुरुआत से लेकर अब तक मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 72,971 हो गई है और 173,128 लोग घायल हो चुके हैं। आम नागरिकों के घरों और बुनियादी ढांचे को जो नुकसान पहुंचा है, उसकी भरपाई करना आने वाले समय में बहुत मुश्किल साबित होगा।

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शांति वार्ता और कूटनीतिक प्रयास

युद्ध को थामने और स्थायी शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन ये बहुत अनिश्चित और नाज़ुक दौर से गुजर रहे हैं। हमास का एक प्रतिनिधिमंडल युद्धविराम पर बातचीत करने के लिए 16 अगस्त को काहिरा पहुंचा। इसी दौरान अमेरिकी दूत जेड कुशनर और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी के बीच भी अहम बैठकें हुईं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रोन ने गाजा के लिए एक निशस्त्रीकरण योजना का प्रस्ताव रखा है, लेकिन इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस 15-सूत्रीय शांति ढांचे को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू की जिद है कि इस्राइली सेना के पीछे हटने से पहले हमास को पूरी तरह से हथियार डालने होंगे।

तनाव और चुनावी सरगर्मी

इस बीच इस्राइली अधिकारियों की तीखी बयानबाजी और बयानों से तनाव में और ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरफ, फिलिस्तीनी क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियों भी तेज हो गईं हैं और आगामी 28 नवंबर 2026 को होने वाले फिलिस्तीनी विधायी चुनावों की तैयारियां चल रही हैं। युद्ध के इस भारी आर्थिक बोझ और मानवीय संकट के बीच आम जनता पिस रही है और हर कोई यही उम्मीद लगा रहा है कि जल्द ही कोई ठोस समाधान निकलेगा ताकि इस विनाशकारी हिंसा को पूरी तरह से रोका जा सके।

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