इजराइल और तुर्की के बीच बढ़ा तनाव, नेतन्याहू के खिलाफ वारंट जारी होने पर एर्दोगन को कहा तानाशाह

Praggya Singh sabal21 August 20263 min read62 viewsWorld
इजराइल और तुर्की के बीच बढ़ा तनाव, नेतन्याहू के खिलाफ वारंट जारी होने पर एर्दोगन को कहा तानाशाह

मध्य पूर्व में तनाव लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है और हाल ही में दोनों देशों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। 21 अगस्त 2026 को इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के कार्यालय ने तुर्की के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdogan को आधिकारिक तौर पर एक यहूदी-विरोधी तानाशाह करार दिया है। इस बयान में तुर्की पर क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगाया गया है और यह भी कहा गया है कि इजराइल ऐसी सभी कोशिशों के खिलाफ पूरी ताकत से कार्रवाई जारी रखेगा।

तुर्की ने जारी किया गिरफ्तारी वारंट

यह कूटनीतिक विवाद उस समय और बढ़ गया जब तुर्की के न्याय मंत्री Akin Gurlek ने एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि तुर्की ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री और पूर्व इजरायली खुफिया अधिकारी Afek Moskovitch के लिए इंटरपोल से रेड नोटिस की भी मांग की गई है। तुर्की के इस वारंट में नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध, मनमाने ढंग से स्वतंत्रता छीनना, जानबूझकर चोट पहुंचाना, यातना देना, भारी चोरी, संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और परिवहन का अपहरण जैसे कई गंभीर आरोप शामिल हैं। यह पूरी जांच गाजा की ओर जाने वाले एक एक्टिविस्ट फ्लोटिला को रोके जाने की घटना से जुड़ी हुई है।

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इजराइल का कड़ा पलटवार

तुर्की के इन कदमों का करारा जवाब देते हुए बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने राष्ट्रपति एर्दोगन पर कुर्द लोगों का नरसंहार करने, हमास के आतंकवादियों को पनाह देने, साइप्रस के आधे हिस्से पर कब्जा करने और पत्रकारों तथा राजनेताओं को रिकॉर्ड संख्या में जेल में डालने का आरोप लगाया। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन सभी कानूनी कार्रवाइयों को इजराइल के नेतृत्व को डराने की एक नाकाम और pathetic कोशिश बताया है।

सीरिया में सैन्य एयरबेस पर एयरस्ट्राइक

दोनों देशों के बीच हाल के दिनों में हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। 18 अगस्त 2026 को इजराइल ने सीरिया के अबू अल-धुहूर सैन्य एयरबेस पर जोरदार एयरस्ट्राइक की। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इसे तुर्की के लिए एक सीधा संदेश बताया है। अमेरिका में इजराइल के राजदूत Yechiel Leiter ने 21 अगस्त को स्पष्ट किया कि यह हमला उस खुफिया जानकारी के बाद किया गया था जिसमें तुर्की द्वारा सीरिया में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने की बात सामने आई थी, जिसे इजराइल ने अपनी रेड लाइन माना था। हालांकि तुर्की के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने इस हमले के दौरान बेस पर किसी भी सैन्य प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी की खबरों से इनकार किया है, लेकिन अंकारा के अधिकारियों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और अमेरिका का कनेक्शन

तुर्की के राष्ट्रपति संचार निदेशक Burhanettin Duran ने इजराइल की आक्रामक भाषा के पीछे नेतन्याहू की आगामी 27 अक्टूबर को होने वाले चुनावों से पहले समर्थन जुटाने की मंशा को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि तुर्की इस प्रकार के पीड़ित बनने के ड्रामे के जाल में बिल्कुल नहीं फंसेगा। दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष Kemal Kılıçdaroğlu ने इस इजरायली हमले और नेतन्याहू की टिप्पणियों को तुर्की की संप्रभुता के खिलाफ एक खुला उकसावा बताया है। इससे पहले यह भी सामने आया था कि राष्ट्रपति एर्दोगन ने 17 अगस्त 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को इजराइल को रोकने के लिए एक कड़ा संदेश दिया था।

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