इजराइल-लेबनान के बीच रोम में फिर शुरू हुई शांति वार्ता, हथियार छोड़ने के मुद्दे पर फंसा पेंच

Praggya Singh sabal4 August 20262 min read65 viewsWorld
इजराइल-लेबनान के बीच रोम में फिर शुरू हुई शांति वार्ता, हथियार छोड़ने के मुद्दे पर फंसा पेंच

इजराइल और लेबनान के प्रतिनिधियों के बीच शांति बहाल करने की कोशिशें फिर तेज हो गई हैं। 04 अगस्त को इटली की राजधानी रोम में दोनों पक्षों के बीच आमने-सामने की बातचीत का नया दौर शुरू हुआ। मार्च में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच शुरू हुए तनाव और संघर्ष के बाद से यह सातवीं ऐसी बैठक है, जिसमें सीमा पर शांति और सुरक्षा व्यवस्था को वापस लाने पर चर्चा की जा रही है। इस बैठक का मुख्य मकसद सीमावर्ती इलाकों में चल रही अशांति को खत्म कर एक स्थिर व्यवस्था कायम करना है।

हिजबुल्लाह का सख्त रुख और लेबनान के पीएम की टिप्पणी

इस महत्वपूर्ण बातचीत के बीच हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने इस पूरी प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसी बातचीत से लेबनान को सिर्फ अपमान और निराशा ही हाथ लगेगी। हिजबुल्लाह ने साफ संकेत दे दिया है कि वे अपने हथियार छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इस टिप्पणी के बाद लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश को सबसे अधिक नुकसान उन लोगों की वजह से हुआ है जिन्होंने बिना सोचे-समझे एकतरफा फैसले लिए और देश को ऐसे युद्धों में झोंक दिया जिनसे कोई लाभ नहीं हुआ, बल्कि इससे इजराइल को हमला करने का मौका मिल गया।

समझौते का मुख्य एजेंडा और गतिरोध

गौरतलब है कि जून महीने में हुई पिछली बातचीत में दोनों पक्षों के बीच एक रूपरेखा तैयार करने पर सहमति बनी थी। इस समझौते के प्रस्ताव में हिजबुल्लाह का निरस्त्रीकरण, दक्षिणी लेबनान से इजराइली सैनिकों की सुरक्षित वापसी और उस पूरे क्षेत्र में लेबनान की सेना को तैनात करने की बात कही गई थी। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि हिजबुल्लाह ने इस पूरे समझौते को सिरे से खारिज कर दिया है और अपने हथियार सौंपने से साफ मना कर दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी हिन्दुस्थान समाचार के माध्यम से सामने आई है। वर्तमान में दोनों पक्षों के बीच शांति कायम करने की राह काफी मुश्किल दिख रही है क्योंकि एक तरफ सरकार है जो शांति चाहती है, वहीं दूसरी तरफ हिजबुल्लाह जैसे संगठन अपने हथियारों को लेकर अड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के जरिए इस गतिरोध को खत्म किया जा सकेगा या फिर तनाव इसी तरह बना रहेगा। क्षेत्र में रह रहे लोगों और प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है क्योंकि सीमा पर जारी अस्थिरता का सीधा असर सुरक्षा और आवागमन पर पड़ता है।

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