Israel Minister Ben-Gvir: इसराइल के मंत्री बेन-ग़वीर का विवादित बयान, गाजा में रोज़ाना 30 से 40 लोगों की हत्या की मांग.

इसराइल की राजनीति में एक बार फिर से बहुत बड़ा विवाद खड़ा हो गया है और इस बार मामला सीधे तौर पर हिंसा और खून-खराबे से जुड़ा हुआ है। Israeli National Security Minister Itamar Ben-Gvir ने एक सार्वजनिक मंच पर बड़ा बयान देते हुए इसराइल की सेना से यह मांग की है कि गाजा में हर रात 30 to 40 people को मौत के घाट उतारा जाना चाहिए। मंत्री महोदय के इस बयान के बाद पूरी दुनिया में हलचल मच गई है और लोग इस तरह की भाषा पर हैरानी जता रहे हैं। आम आदमी की भाषा में समझें तो देश के एक बड़े मंत्री खुलेआम रोजाना लोगों को मारने की बात कर रहे हैं।
पॉडकास्ट के दौरान दिया गया बयान
यह पूरा मामला 15 August का है जब मंत्री इतामार बेन-ग़वीर एक पॉडकास्ट कार्यक्रम 'October 8' में हिस्सा लेने पहुंचे थे। बातचीत के दौरान उन्होंने बहुत ही तीखा बयान दिया और दावा किया कि गाजा में रहने वाले कुछ लोग ऐसे हैं जो जीने के लायक नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूरा गाजा सिर्फ इसराइल का है और वहां से फिलिस्तीनी लोगों को हमेशा के लिए बाहर निकाल देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी इच्छा जताई कि उस इलाके में दोबारा से इसराइली बस्तियों को बसाया जाना चाहिए, जिससे वहां के हालात और ज्यादा खराब हो सकते हैं।
नेतन्याहू की रणनीति से मतभेद
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इतामार बेन-ग़वीर देश के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की कैबिनेट के बहुत ही सीनियर सदस्य हैं। हालांकि, उनके पास इसराइल की सेना यानी Israel Defense Forces को सीधे तौर पर कोई भी हुक्म देने की ताकत नहीं है। इसके बावजूद वे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौजूदा नीतियों के खिलाफ खुलकर बोलते नजर आए हैं। प्रधानमंत्री नेतन्याहू इस समय अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump की तरफ से समर्थित शांति प्रस्ताव के हिसाब से अपनी नीतियां चला रहे हैं, जिसका यह मंत्री कड़ा विरोध कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ सकती है मुश्किल
प्रधानमंत्री नेतन्याहू और मंत्री बेन-ग़वीर के बीच बयानों को लेकर पहले भी कई बार टकराव हो चुका है। इस तरह के भड़काऊ बयानों की वजह से इसराइली सरकार को अक्सर संयुक्त राष्ट्र की अदालतों में जवाब देना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसराइल पर गाजा में जनसंहार के इरादे रखने के गंभीर आरोप लगाए जाते हैं, हालांकि इसराइली सरकार इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करती आई है। आम लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि इस तरह के बयानों से युद्ध के हालात और ज्यादा भयानक हो जाते हैं और शांति की उम्मीदें पूरी तरह से खत्म होने लगती हैं।