सीरिया के मिलिट्री एयरबेस पर इसराइल का बड़ा हमला, तुर्की के मिलिट्री डिप्लॉयमेंट को लेकर हुआ विवाद.

Aanya18 August 20263 min read79 viewsWorld
सीरिया के मिलिट्री एयरबेस पर इसराइल का बड़ा हमला, तुर्की के मिलिट्री डिप्लॉयमेंट को लेकर हुआ विवाद.

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर से काफी ज्यादा बढ़ गया है और इस बार मामला सीरिया और इसराइल के बीच का है। 18 अगस्त 2026 को इसराइल के लड़ाकू विमानों ने सीरिया के इडलिब प्रांत में स्थित अबू अल-दुहूर मिलिट्री एयरपोर्ट के रनवे पर कुल आठ हवाई हमले किए। सीरियाई सरकारी मीडिया ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि इन हमलों की वजह से एयरपोर्ट को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा है, हालांकि राहत की बात यह रही कि इसमें किसी भी इंसान के हताहत होने की कोई खबर सामने नहीं आई है। इस पूरे सैन्य टकराव की मुख्य वजह एक दिन पहले यानी 17 अगस्त को तुर्की के सैन्य प्रतिनिधिमंडल द्वारा उस जगह का दौरा करना था, जो रनवे की मरम्मत के काम को आसान बनाने के लिए किया गया था।

इसराइल का पक्ष और सुरक्षा समझौता

इस हमले के बाद इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से एक बयान जारी किया गया जिसमें साफ बताया गया कि इसराइल और सीरिया के बीच सुरक्षा मामलों को लेकर पहले से ही एक समझौता था जिसके तहत दोनों को 'स्टेटस को' यानी यथास्थिति बनाए रखनी थी। इसराइल ने यह आरोप लगाया कि सीरिया इस समझौते को तोड़ने के बिल्कुल करीब पहुंच गया था क्योंकि उसने अलेप्पो के पास मौजूद इस एयरबेस पर तुर्की के सैनिकों को तैनात करने की अनुमति दे दी थी। इसराइली कार्यालय ने यह भी कहा कि उन्होंने सीरिया को पहले ही कई बार चेतावनी दे दी थी कि इस तरह की सैन्य तैनाती से उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा होता है और वे इस तरह के जोखिमों को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसराइल का मानना है कि उनकी सीमाओं के पास किसी भी विदेशी सेना की मौजूदगी उनके लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

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सीरिया और तुर्की की कड़ी प्रतिक्रिया

इसराइल के इस कदम पर सीरियाई विदेश और प्रवासी मंत्रालय ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी और इन हमलों को सीरिया की संप्रभुता पर एक अनुचित आक्रामकता और खुला उल्लंघन करार दिया। इसके साथ ही तुर्की के विदेश मंत्रालय ने भी इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की और इसे सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बताया। रिपोर्टर बराक रविद से बात करते हुए एक तुर्की अधिकारी ने इस बात से साफ इनकार किया कि बेस पर तुर्की के कोई सैनिक मौजूद थे। उन्होंने इसराइल पर आरोप लगाया कि वह क्षेत्र में हालात खराब करने के लिए ऐसे झूठे बहाने बना रहा है और केवल तनाव बढ़ाना चाहता है।

अमेरिका की प्रतिक्रिया और मध्यस्थता की मांग

तुर्की में अमेरिका के राजदूत और सीरिया के लिए विशेष दूत टॉम बराक ने इस पूरी घटना को लेकर अपनी बात रखी और इन एयरस्ट्राइक्स को एक गैर-जरूरी तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया जो क्षेत्रीय स्थिरता को आगे बढ़ाने में बिल्कुल मदद नहीं करता है। टॉम बराक ने हमलों से ठीक कुछ घंटे पहले इस्तांबुल में सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शैबानी से मुलाकात की थी। उन्होंने बताया कि अहमद अल-शराा के नेतृत्व वाली सीरियाई सरकार ने इसराइल के प्रति काफी नरमी और संयम दिखाया था। टॉम बराक ने इस बात पर जोर दिया कि इसराइल, सीरिया और तुर्की के बीच एक औपचारिक संघर्ष विराम तंत्र यानी डीकफ्लिक्शन मैकेनिज्म होना बहुत जरूरी है, और उन्होंने यह भी बात उठाई कि इस इसराइली सैन्य कार्रवाई से पहले तुर्की को किसी भी तरह की कोई पूर्व चेतावनी नहीं दी गई थी।

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