इसराइल ने सीरिया के एयरबेस पर किया बड़ा हवाई हमला, अक्टूबर चुनाव से पहले बढ़ा तनाव.

Nura Basta19 August 20262 min read83 viewsWorld
इसराइल ने सीरिया के एयरबेस पर किया बड़ा हवाई हमला, अक्टूबर चुनाव से पहले बढ़ा तनाव.

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर से बड़ा तनाव देखने को मिल रहा है जब इसराइल ने आधिकारिक तौर पर सीरिया पर हमले की बात स्वीकार की है। यह हमला उत्तरी सीरिया के अबू अल-धुहूर एयरबेस पर 18 अगस्त 2026 को किया गया था। इस सैन्य कार्रवाई के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और आम लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इस हमले का बचाव करते हुए कहा कि सीरिया एक सुरक्षा समझौते को तोड़ने की कगार पर था।

हमले की वजह और सीरिया की प्रतिक्रिया

इसराइली अधिकारियों का दावा था कि सीरिया उस एयरबेस पर तुर्की की सेना को तैनात करने की अनुमति दे रहा था जो अलेप्पो के पास स्थित है। इसराइल ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी सुरक्षा के खिलाफ किसी भी खतरे को बर्दाश्त नहीं करेगा और क्षेत्र में पुरानी स्थिति को बहाल करना चाहता है। दूसरी ओर, सीरिया के विदेश मंत्री असाद अल-शाइबानी ने इस हमले को बिना किसी कारण के उकसाने वाला कदम बताया। उन्होंने इसे सीरिया की संप्रभुता का उल्लंघन करार देते हुए तुरंत युद्ध रोकने की मांग की है।

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परमाणु सामग्री और तुर्की का पक्ष

अपनी सफाई के दौरान सीरियाई विदेश मंत्री ने यह भी खुलासा किया कि देश ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA को कई टन परमाणु सामग्री की स्वेच्छा से जानकारी दी है, जिसकी निगरानी महानिदेशक राफेल ग्रॉसी कर रहे हैं। इस बीच, सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शराअ पर इस उल्लंघन का जवाब देने का भारी दबाव बना हुआ है। वहीं, तुर्की ने इसराइल के सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया और उन्हें बेबुनियाद आरोप बताया। तुर्की ने साफ किया कि एयरबेस पर उसकी कोई भी सैन्य मौजूदगी नहीं है और उसने नेतन्याहू पर विस्तारवादी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया है।

अमेरिका की चिंता और आगामी चुनाव

सीरिया में अमेरिका के दूत टॉम बराक ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस हवाई हमले को एक अनावश्यक तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया जिससे क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा नहीं मिलता है। अमेरिकी अधिकारी स्थिति को संभालने के लिए लगातार बातचीत की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कई वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस हमले के पीछे इसराइल के आगामी संसदीय चुनाव हैं जो 27 अक्टूबर 2026 को होने वाले हैं।

इससे पहले 14 अगस्त को मोसाद के डायरेक्टर रोमन गोफमैन और सीरियाई विदेश मंत्री के बीच तुर्की की मौजूदगी को लेकर फोन पर बातचीत भी हुई थी, लेकिन इसके बावजूद सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया गया। इसके अगले दिन यानी 19 अगस्त को इसराइल के सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल इयाल ज़मीर ने दक्षिणी सीरिया के एक सुरक्षा जोन का दौरा किया। उन्होंने कसम खाई कि सेना सीमा पर किसी भी दुश्मन ताकत को पैर नहीं जमाने देगी। विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू आगामी चुनावों से पहले अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए ऐसे कदमों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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