इसराइल और सीरिया के बीच बढ़ी टेंशन, मोसाद प्रमुख की बातचीत के बाद सीरियाई एयरबेस पर किया बड़ा हवाई हमला।

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है और इस बार मामला इसराइल और सीरिया के बीच का है। सीरिया में बशर अल-असद की सरकार गिरने के बाद दोनों देशों के बीच पहली बार उच्च स्तर पर बातचीत हुई थी, लेकिन इसके तुरंत बाद इसराइल ने सीरिया के एक एयरबेस पर ताबड़तोड़ हवाई हमले कर दिए। इस घटना ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है और आम लोगों के मन में भी सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो गई है।
मोसाद प्रमुख और सीरियाई विदेश मंत्री के बीच हुई थी फोन पर बात
समाचार एजेंसी रॉयटर्स को तीन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 14 अगस्त 2026 को इसराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख रोमन गोफमैन ने सीरिया के विदेश मंत्री असाद अल-शाइबानी के साथ एक उच्च स्तरीय फोन पर बातचीत की थी। रोमन गोफमैन ने इसी साल 2 जून 2026 को अपना पद संभाला था। इन दोनों के बीच मुख्य रूप से सीरिया में तुर्की की बढ़ती सैन्य मौजूदगी को लेकर चर्चा हुई थी। इस बातचीत के दौरान तुर्की के सैनिकों की तैनाती, हथियारों की बिक्री और ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर पूछताछ की गई थी। बशर अल-असद के दिसंबर 2024 में सत्ता से हटने के बाद इसराइल और सीरिया की सरकार के बीच यह अब तक की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बातचीत मानी जा रही थी। हालांकि, इस रिपोर्ट पर इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय या विदेश मंत्री शाइबानी के प्रतिनिधियों की तरफ से तुरंत कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था।
इसराइल ने अबू दुहूर एयरबेस पर किए आठ हवाई हमले
इस फोन कॉल के ठीक कुछ दिनों बाद यानी 18 अगस्त 2026 को इसराइल ने उत्तर-पश्चिम सीरिया में स्थित अबू दुहूर एयरबेस को निशाना बनाते हुए कई हवाई हमले कर दिए। सीरिया के सरकारी मीडिया ने जानकारी दी कि कुल आठ हवाई हमले सीधे रनवे पर किए गए, जिनकी वजह से संपत्ति को तो काफी नुकसान हुआ लेकिन गनीमत यह रही कि किसी भी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ और कोई हताहत नहीं हुआ। इसराइल ने अपनी सफाई में कहा कि यह कार्रवाई इसलिए जरूरी हो गई थी क्योंकि सीरिया सुरक्षा के पुराने नियमों को तोड़ रहा था। इसराइल का आरोप था कि सीरिया तुर्की की सेना को वहां पैर जमाने की अनुमति दे रहा है, जिसे इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसराइल की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह भी कंफर्म किया कि इस इसराइल ने सीरिया को इस सैन्य गतिविधियों को लेकर पहले भी कई बार चेतावनी दी थी।
सीरिया और तुर्की ने किया हमलों का कड़ा विरोध
इसराइल के इन हमलों के जवाब में सीरिया के विदेश मंत्री असाद अल-शाइबानी ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का खुला उल्लंघन और बिना किसी वजह का भड़काऊ कदम बताया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि यह घटना ठीक उनके 19-20 अगस्त को होने वाली आधिकारिक इस्लामाबाद यात्रा से कुछ समय पहले ही घटी। दूसरी तरफ, तुर्की की सरकार ने इसराइल के सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया और उन्हें मनगढ़ंत आरोप बताया, जिनका मकसद सिर्फ गैरकानूनी सैन्य कार्रवाई को सही ठहराना था। अमेरिका के राजदूत टॉम बराक ने भी इस हमलों की आलोचना करते हुए इसे एक गैर-जरूरी तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया और कहा कि अमेरिका सभी देशों के बीच बातचीत और शांति स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान की सरकार ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया।