इजरायली मंत्री इतामार बेन-गवि फिलिस्तीनी घरों को गिराए जाने पर दिए विवादित बयान, कहा यह संप्रभुता की आवाज है

इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवि ने हाल ही में रामला के अल-जवारिश इलाके का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने फिलिस्तीनी घरों और इमारतों को तोड़े जाने की प्रक्रिया की जमकर तारीफ की। मंत्री ने बुलडोजर और भारी मशीनों की आवाज को बेहद शानदार बताया और इसे देश की संप्रभुता की आवाज करार दिया। उनके इस दौरे और बयानों ने इलाके में तनाव को और ज्यादा बढ़ा दिया है।
दस हजार घरों को गिराने का लक्ष्य
मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए साफ किया कि इजरायली प्रशासन जल्द ही 10,000 संरचनाओं को गिराने के अपने आंकड़े के बेहद करीब पहुंच चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन भी इमारतों को अवैध घोषित किया गया है, उन्हें गिराने का काम बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा। इजरायली प्रशासन इन सभी इमारतों को गिराने के पीछे मुख्य कारण निर्माण अनुमति यानी बिल्डिंग परमिट का न होना बताता है।
मानवाधिकार संगठनों की चिंता और आंकड़े
मानवाधिकार संगठनों का इस मामले में कहना है कि फिलिस्तीनी नागरिकों के लिए प्लानिंग सिस्टम के जरिए बिल्डिंग परमिट हासिल करना बेहद मुश्किल बना दिया गया है। स्थिति यह है कि अधिकांश आवेदन प्रशासनिक कारणों से खारिज कर दिए जाते हैं। 30 सितंबर 2025 तक जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, इजरायली अधिकारियों ने कब्जाए गए वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में कुल 1,288 फिलिस्तीनी संरचनाओं को नेस्तनाबूद कर दिया।
इस बड़े पैमाने पर हुई तोड़फोड़ की कार्रवाई के कारण 1,400 से ज्यादा लोग बेघर हो गए और उन्हें अपना इलाका छोड़ना पड़ा। साल 2024 की समान अवधि की तुलना में यह आंकड़ा करीब 39 प्रतिशत ज्यादा है। नार्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल की क्षेत्रीय निदेशक एंजेला कैरेड्डा ने इस पूरी कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उन्होंने पहले ही स्पष्ट किया था कि यह बस्तियों के विस्तार को बढ़ावा देने और स्थानीय परिवारों को जबरन हटाने के लिए एक सुनियोजित नीति के तहत किया जा रहा है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए आप ReliefWeb Report पर जा सकते हैं।