इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने किया नए सड़क का उद्घाटन, वेस्ट बैंक में बस्तियों का विस्तार जारी.

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 18 अगस्त 2026 को वेस्ट बैंक में एक नई सड़क परियोजना का आधिकारिक रूप से उद्घाटन किया। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम कब्जे वाले वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार की व्यापक सरकारी योजना का एक हिस्सा है। इस विकास के दौरान क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है, जिसे कुस्रा गांव की एक हालिया घटना से भी समझा जा सकता है। उसी दिन, फिलिस्तीनी अमेरिकी निवासी लुई रिडी को अपने घर पर एक यहूदी settler के साथ आमना-सामना करना पड़ा। यह घर दो अन्य फिलिस्तीनी संपत्तियों के साथ एक हफ्ते से अधिक समय से घेरे में था। अमेरिकी अधिकारियों ने कथित तौर पर प्रधानमंत्री से ऐसी settler गतिविधियों की निंदा करने का आग्रह किया है, लेकिन कुस्रा की घेराबंदी को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
वेस्ट बैंक में बुनियादी ढांचे और नई बस्तियों के लिए भारी बजट का आवंटन
यह बुनियादी ढांचा परियोजना वेस्ट बैंक के लिए वित्तीय स्वीकृतियों की एक श्रृंखला के बाद सामने आई है। जुलाई 2026 में, इजरायली सुरक्षा कैबिनेट ने 34 नई बस्तियों को स्थापित करने के लिए 1.3 अरब शेकेल यानी लगभग 434 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बजट को मंजूरी दी थी। वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने पुष्टि की कि इन क्षेत्रों को सेवा प्रदान करने वाली सड़कों के निर्माण के लिए अतिरिक्त 1.075 अरब शेकेल आवंटित किए गए हैं। यह मई 2026 की उस स्वीकृति पर आधारित है जिसमें 20 आउटपोस्ट और मौजूदा बस्तियों को जोड़ने वाले नेटवर्क के लिए 270 मिलियन डॉलर दिए गए थे। इन परियोजनाओं को मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच और परिवहन मंत्री मिरी रेगेव द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है। यह उस सरकारी नीति के अनुरूप है जो यहूदी लोगों के यहूदा और सामरिया पर अधिकार का समर्थन करती है।
गाजा की स्थिति पर कूटनीतिक प्रयास और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
दूसरी तरफ, गाजा में चल रही स्थिति को लेकर कूटनीतिक प्रयास लगातार जारी हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी वार्ताकार जेरेड कुशनर के बीच 17 अगस्त को हुई बैठक के बाद युद्धविराम की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। प्रधानमंत्री और शांति परिषद के बीच 18 अगस्त को हुई चर्चाओं में एक निरस्त्रीकरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य योजना को पूरी तरह से लागू करने पर जोर दिया गया। यह इस समझ के साथ था कि इजरायली सेना तब तक तैनात रहेगी जब तक हमास पूरी तरह से हथियार नहीं डाल देता। यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय निकायों ने बार-बार कहा है कि ऐसी बस्ती गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध हैं और दो-राष्ट्र समाधान के रास्ते में एक बड़ी बाधा हैं।