West Bank में इसराइली Settlers ने बनाई नई अवैध बस्तियां, मिड-अगस्त 2026 में हिंसा और विस्थापन तेज.

Nura Basta17 August 20262 min read85 viewsWorld
West Bank में इसराइली Settlers ने बनाई नई अवैध बस्तियां, मिड-अगस्त 2026 में हिंसा और विस्थापन तेज.

Occupied West Bank के इलाकों में इसराइली बस्तियों को लेकर तनाव काफी बढ़ गया है। Umm Safa और Burqa गांवों के पास इसराइली सेटलर्स ने नई अवैध आउटपोस्ट यानी बस्तियां स्थापित कर ली हैं। मध्य अगस्त 2026 के दौरान क्षेत्रीय तनाव में भारी तेजी आई है जिसके बाद ये अवैध निर्माण सामने आए। अंतरराष्ट्रीय कानून और घरेलू इसराइली नियमों के मुताबिक भी सरकारी अनुमति के बिना इस तरह का निर्माण करना पूरी तरह अवैध माना जाता है। इस मामले की पूरी जानकारी ReliefWeb की रिपोर्ट में दी गई है।

हिंसा की घटनाओं में भारी बढ़ोतरी और UN की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय OCHA ने क्षेत्र में हिंसा और हमलों की तीखी आलोचना की है। रिपोर्ट के अनुसार इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक फिलिस्तीनी समुदायों के खिलाफ सेटलर्स द्वारा 1,430 से ज्यादा हमले किए जा चुके हैं। हाल ही में हुए सैन्य अभियानों और हमलों की वजह से बड़े पैमाने पर लोगों को चोटें आई हैं और वे बेघर हुए हैं। पिछले 48 घंटों के दौरान Hebron, Nablus और Ramallah जैसे क्षेत्रों में कई सैन्य छापे मारे गए और सेटलर्स द्वारा घुसपैठ की गई। इन घटनाओं में आम नागरिकों के खिलाफ लाइव एम्युनिशन यानी असली गोलियों का इस्तेमाल किया गया और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन तमाम ताजा हालातों के बारे में Qatar News Agency (QNA) ने अपनी रिपोर्ट में विस्तार से बताया है।

विस्थापन का आंकड़ा और अंतरराष्ट्रीय चिंता

इसराइली रक्षा बलों यानी IDF ने इन अवैध आउटपोस्ट के निर्माण को अस्वीकार्य और निंदनीय बताया है। इसके बावजूद हिंसा का दौर लगातार जारी है जिसकी वजह से साल 2026 में अब तक लगभग 3,800 फिलिस्तीनी नागरिक अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर हो चुके हैं। इस लगातार बढ़ते तनाव पर दुनिया भर के देशों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस तरह बस्तियों का दायरा बढ़ाने की रणनीति से यह क्षेत्र और अधिक टुकड़ों में बंट जाएगा। साथ ही इससे दो-राष्ट्र समाधान यानी टू-स्टेट सॉल्यूशन की संभावना को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। स्थानीय लोग और मानवाधिकार संगठन इस बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं ताकि आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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