आईसीसी अध्यक्ष पर अमेरिकी प्रतिबंधों से जापान नाराज, पीएम ताकाइची ने बताया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण फैसला

अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय यानी ICC की अध्यक्ष और जापानी नागरिक तोमोको अकाने पर अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बाद जापान की सरकार ने अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने इस अमेरिकी कदम को देश के रुख के बिल्कुल उलट बताया है और इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। जापान इस पूरे मामले को काफी गंभीरता से ले रहा है क्योंकि वह शुरू से ही इस वैश्विक अदालत का समर्थन करता आया है और इसके कामकाज में पूरा भरोसा रखता है।
अमेरिका ने क्यों उठाए हैं यह कड़े कदम
हाल ही में अमेरिका ने ICC की अध्यक्ष तोमोको अकाने और वरिष्ठ ट्रायल वकील अब्दुलाये सेये के खिलाफ प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इन अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि वे ऐसे देशों के खिलाफ अदालत की कार्रवाई में सीधे तौर पर शामिल रहे हैं, जिन्होंने इस अदालत के अधिकार क्षेत्र को कभी स्वीकार नहीं किया है। वॉशिंगटन का साफ तौर पर यह कहना है कि ICC ने अमेरिका और उसके जैसे अन्य गैर-सदस्य देशों के नागरिकों पर अपना अधिकार क्षेत्र स्थापित करने की कोशिश में अपनी तय सीमाओं को लांघा है। ट्रंप प्रशासन ने इस पूरी स्थिति को अमेरिकी संप्रभुता के लिए एक बड़ा खतरा बताया है और यह संकेत भी दिए हैं कि आने वाले समय में इस अदालत के खिलाफ और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
जापान की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक प्रयास
दूसरी तरफ देखा जाए तो ICC के सबसे बड़े वित्तीय समर्थकों में से एक जापान ने यह बात पूरी तरह साफ कर दी है कि वह इस संस्थान की स्वतंत्रता और इसकी अहम भूमिका का समर्थन करना कभी बंद नहीं करेगा। पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ताकाइची ने बताया कि जापान इस वैश्विक अदालत के प्रति अपनी सभी प्रतिबद्धताओं पर पूरी तरह कायम है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जापान की सरकार ने अंतिम समय तक अमेरिका को यह समझाने और मनाने की पूरी कोशिश की थी कि वह जापानी नागरिक अकाने के खिलाफ इस तरह की कोई भी कार्रवाई न करे।
जापानी प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि उनकी सरकार अब आगे आने वाली हर एक परिस्थिति पर बहुत ही बारीकी से नजर बनाए रखेगी। देश की जरूरत और हालात को देखते हुए आगे जो भी उचित कदम होगा, उस पर विचार किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह के प्रतिबंधों से कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस पर और अधिक चर्चा होने की पूरी उम्मीद है।