Tokyo में जापानी एक्टिविस्ट युसुके फुरुसावा का गाजा संघर्ष के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन, 1000 दिनों से कर रहे हैं सोलो प्रोटेस्ट।

टोक्यो की व्यस्त सड़कों पर इन दिनों एक जापानी नागरिक का शांतिपूर्ण लेकिन कड़ा विरोध प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है। 49 साल के जापानी कारपेंटर Yusuke Furusawa गाजा में चल रहे संघर्ष के विरोध में लगातार अकेले ही सड़कों पर उतर रहे हैं। हाल ही में 18 अगस्त 2026 को सामने आए वीडियो फुटेज में यह एक्टिविस्ट सड़क पर बैठे हुए नजर आए और उन्होंने थकने के बावजूद Free Palestine के नारे लगाना जारी रखा। आम जनता की भीड़ के बीच उनका यह अंदाज लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।
शिजुकु और शिबुया स्टेशनों पर लगातार जारी है प्रदर्शन
फुरुसावा ने साल 2023 में अपनी इस अनोखी मुहिम की शुरुआत की थी। इसके बाद से वह टोक्यो के सबसे भीड़भाड़ वाले इलाकों जैसे Shinjuku और Shibuya स्टेशनों के पास लगातार नजर आते हैं। उनके हाथ में हमेशा फिलिस्तीनी झंडा और तख्तियां होती हैं जिन पर Stop Gaza genocide जैसे संदेश लिखे रहते हैं। वह वहां से गुजरने वाले आम लोगों के सामने खड़े होकर युद्ध के कारण हो रहे मानवीय नुकसान पर सवाल उठाते हैं और लोगों को इस मुद्दे पर सोचने के लिए मजबूर करते हैं।
जापानी सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
इस एक्टिविस्ट का मुख्य उद्देश्य जापानी समाज में राजनीतिक मामलों पर चुप्पी साधने की संस्कृति को चुनौती देना है। उनका साफ कहना है कि एक लोकतांत्रिक देश के नागरिकों को मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ अपनी आवाज जरूर उठानी चाहिए। उन्होंने जापान सरकार के आधिकारिक रुख की भी कड़ी आलोचना की है। उनका आरोप है कि टोक्यो की सरकार खुद कोई स्वतंत्र फैसला लेने के बजाय केवल अमेरिका की नीतियों का ही समर्थन कर रही है। फुरुसावा ने देश के विदेश मंत्री पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि वह इजराइल के कदमों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताने में नाकाम रहे हैं।
कानूनी बाधाओं और आलोचना के बावजूद डटे हैं फुरुसावा
सार्वजनिक प्रदर्शनों के लिए जापान के नियम बेहद सख्त हैं और इसके लिए पहले से अनुमति लेनी पड़ती है। इसके अलावा उनके इस तरह रोज प्रदर्शन करने से होने वाली बाधा के कारण उन्हें कई बार आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ता है। हालांकि इन सब मुश्किलों के बावजूद उनका हौसला कम नहीं हुआ है और वह पूरी तरह से अडिग हैं। उनका कहना है कि उन्हें यह ताकत गाजा के लोगों के संघर्ष और उनकी सहनशक्ति से मिलती है। वह अपने इस सार्वजनिक कदम की पूरी जिम्मेदारी खुद लेते हैं और आगे भी ऐसा करना जारी रखने की बात कहते हैं।