Libya Election Pact: लीबिया में चुनाव और राजनीतिक संकट को खत्म करने के लिए हुआ बड़ा समझौता, ट्यूनीशिया में साइन हुआ ड्राफ्ट.

Aanya25 August 20263 min read53 viewsWorld
Libya Election Pact: लीबिया में चुनाव और राजनीतिक संकट को खत्म करने के लिए हुआ बड़ा समझौता, ट्यूनीशिया में साइन हुआ ड्राफ्ट.

लीबिया में सालों से चले आ रहे राजनीतिक गतिरोध को खत्म करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। हाल ही में बने '4+4' कमिटी ने चुनावों और देश की कार्यकारी सत्ता को एकजुट करने के लिए एक शुरुआती समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह महत्वपूर्ण समझौता ट्यूनीशिया की राजधानी ट्यूनिस में आयोजित सातवीं बैठक के दौरान 20 और 21 अगस्त 2026 को तय हुआ। इस पूरी पहल को आगे बढ़ाने में संयुक्त राष्ट्र के समर्थन मिशन यानी UNSMIL ने बड़ी भूमिका निभाई है, जिसका मुख्य मकसद देश में राष्ट्रपति और संसदीय चुनावों के लिए नए चुनावी कानून बनाना और नेशनल इलेक्शंस कमीशन का पुनर्गठन करना है। इस कमिटी में लीबिया के पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों से चार-चार प्रतिनिधि शामिल हैं, जिन्होंने इस महीने के अंत यानी अगस्त 2026 से पहले लीबिया के अंदर ही एक और अगली बैठक करने का फैसला किया है ताकि इसे लागू करने के तरीकों को अंतिम रूप दिया जा सके।

अमेरिकी अधिकारियों और स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रिया

इस समझौते के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। लीबिया के प्रधानमंत्री अब्दुल हामिद दबेइबा ने अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ सलाहकार जेरेमी बर्नट के साथ इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान दोनों पक्षों ने '4+4' समझौते को देश में राष्ट्रीय स्थिरता लाने के लिए एक बेहद जरूरी कदम बताया। यह पूरा ढांचा संयुक्त राष्ट्र द्वारा अगस्त 2025 में पेश किए गए एक राजनीतिक रोडमैप पर आधारित है, जिसका उद्देश्य पूर्वी लीबिया की संसद यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और त्रिपोली स्थित सरकार के अधीन काम करने वाले हाई काउंसिल ऑफ स्टेट के बीच चल रहे विवादों को सुलझाना है। ब्रिटेन ने भी संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष प्रतिनिधि टेटा के प्रयासों का समर्थन किया है और लीबिया के नेताओं से अपील की है कि वे इस मौके का पूरा फायदा उठाकर देश को चुनावों की तरफ आगे ले जाएं। वहीं, संयुक्त राष्ट्र में लीबिया के प्रतिनिधि ने साफ किया है कि देश में किसी भी तरह का वैध राजनीतिक रास्ता तभी सफल हो सकता है जब आम जनता की आवाज को प्राथमिकता दी जाए और बाहरी हस्तक्षेप को पूरी तरह से रोका जाए, जैसा कि QNA News की रिपोर्ट में बताया गया है।

समझौते के सामने आने वाली चुनौतियां

भले ही इस समझौते को एक बड़ी उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन कई राजनीतिक विशेषज्ञों और जानकारों ने इसकी सफलता पर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते में अभी भी कई कानूनी खामियां मौजूद हैं और इसे जमीन पर लागू करने का कोई स्पष्ट तरीका नजर नहीं आ रहा है। आलोचकों का कहना है कि जिन लोगों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, उनका उन संस्थागत अधिकारियों के साथ तालमेल की कमी है जिनके जिम्मे असल में बदलाव लाने का काम है। UK Government Statement के अनुसार, देश के भीतर बंटी हुई संस्थाएं और अलग-अलग प्रशासन अभी भी शांति और चुनाव की राह में एक बड़ा रोड़ा बने हुए हैं। आम जनता और प्रवासी लोग भी चाहते हैं कि जल्द से जल्द देश में स्थिति सामान्य हो ताकि सभी प्रशासनिक दिक्कतें दूर हो सकें और शांति का माहौल बन सके।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin
Share:

Comments

Leave a comment