Mossad में बड़ी हलचल: ईरान सरकार गिराने की नाकाम योजना के बाद दो बड़े अधिकारी बर्खास्त

Praggya Singh sabal6 August 20262 min read66 viewsWorld
Mossad में बड़ी हलचल: ईरान सरकार गिराने की नाकाम योजना के बाद दो बड़े अधिकारी बर्खास्त

इजरायल की खुफिया एजेंसी Mossad में इन दिनों बड़ी उठापटक चल रही है। 6 अगस्त 2026 को सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Mossad के प्रमुख Roman Gofman ने एजेंसी के दो शीर्ष अधिकारियों को उनके पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई ईरान में शासन परिवर्तन की एक ऐसी योजना के फेल हो जाने के बाद की गई है, जो काफी समय से गोपनीय तरीके से तैयार की जा रही थी। इस घटनाक्रम ने सुरक्षा जगत में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या थी वह गुप्त योजना

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह एक बेहद महत्वाकांक्षी और गुप्त Mossad-CIA प्रस्ताव था। इस योजना के तहत इरादा यह था कि कुर्दिस्तान के जमीनी बलों को ईरान में दाखिल कराया जाए। उन्हें अमेरिका और इजरायल की वायु सेना से सुरक्षा और समर्थन मिलने वाला था। इस पूरे अभियान का लक्ष्य ईरान के मौजूदा नेतृत्व को हटाना था, ताकि वहां पूर्व राष्ट्रपति Mahmoud Ahmadinejad को सत्ता में फिर से स्थापित किया जा सके। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने फरवरी में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के सामने यह प्रस्ताव रखा था ताकि उन्हें ईरान के खिलाफ सैन्य हस्तक्षेप के लिए मनाया जा सके।

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अधिकारियों पर क्यों गिरी गाज

N12 (Channel 12) सहित इजरायली मीडिया ने बताया है कि Mossad प्रमुख Roman Gofman इस विफलता के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाना चाहते थे। उनके और इन अधिकारियों के बीच काम करने के दौरान पहले से ही तनावपूर्ण रिश्ते थे। बर्खास्त किए गए अधिकारियों में Mossad के इंटेलिजेंस डायरेक्टोरेट और ईरान डिवीजन के प्रमुख शामिल हैं। हालांकि, सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि इसे आपसी सहमति और एक बड़ी संगठनात्मक पुनर्गठन प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि भले ही इन अधिकारियों को उनके प्रमुख पदों से हटा दिया गया है, लेकिन उम्मीद है कि वे अभी भी एजेंसी के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में बने रहेंगे। यह पूरी घटना दिखाती है कि कैसे खुफिया ऑपरेशन में मिली नाकामी के बाद एजेंसी के भीतर अंदरूनी तौर पर बड़े बदलाव किए जाते हैं। इस मामले ने न केवल इजरायल की ईरान को लेकर नीतियों पर चर्चा तेज कर दी है, बल्कि यह भी बताया है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े फैसलों के पीछे कितना जोखिम और आंतरिक संघर्ष छिपा होता है।

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