नेपाल सरकार का बड़ा फैसला, चीनी दबाव के बाद तिब्बती अध्ययन का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हुआ रद्द.

नेपाल सरकार के सख्त निर्देश के बाद इस महीने के आखिरी सप्ताह में काठमांडू में आयोजित होने वाला इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर तिब्बतन स्टडीज यानी आईएटीएस (IATS) का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है। इस सम्मेलन को लेकर पिछले कुछ दिनों से कूटनीतिक हलकों में काफी चर्चा चल रही थी और अंततः स्थानीय प्रशासन व सरकार के दखल के बाद इसे स्थगित करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है।
स्थानीय आयोजकों में शामिल काठमांडू विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले हिमालय सेंटर फॉर एशियन स्टडीज के निदेशक डॉ सागरराज शर्मा ने इस बात की पूरी जानकारी दी है। उन्होंने साफ तौर पर बताया कि नेपाल सरकार के विशेष अनुरोध और आग्रह के बाद ही आयोजकों ने इस बड़े सम्मेलन को आयोजित नहीं करने का बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया है। काठमांडू में होने वाले आईएटीएस के इस 17वें सम्मेलन का आयोजन संयुक्त रूप से काठमांडू विश्वविद्यालय, सेंटर फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज और रांगजुंग येशे इंस्टीट्यूट द्वारा मिलकर किया जाना तय हुआ था।
चीन का दबाव और प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति
मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, चीन सरकार के कड़े दबाव के बाद निर्वासित तिब्बती सरकार यानी सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (सीटीए) ने यह कड़ा निर्णय लिया था कि वे अपने किसी भी प्रतिनिधि को इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नेपाल नहीं भेजेंगे। नेपाल के विदेश मंत्रालय से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के प्रतिनिधियों के नेपाल आने और इस सम्मेलन के दौरान तिब्बती मुद्दों पर खुलकर चर्चा होने की संभावना को भांपते हुए नेपाल में तैनात चीनी राजदूत चांग ने नेपाली सरकार के तमाम बड़े अधिकारियों के समक्ष अपनी गहरी चिंता व्यक्त की थी।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के अचानक रद्द होने से नेपाल और उसके पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर स्थिति काफी हद तक सहज हो गई है और किसी भी प्रकार के संभावित विवाद को समय रहते टाल दिया गया है।
तय कार्यक्रम और इतिहास
यह प्रतिष्ठित सम्मेलन नेपाल की राजधानी काठमांडू में आगामी 23 अगस्त से 29 अगस्त तक आयोजित होने वाला था। इस भव्य आयोजन में दुनिया भर के कुल 39 देशों से लगभग 720 प्रतिनिधि अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पूरी तरह तैयार थे और उनकी भागीदारी भी पूरी तरह से सुनिश्चित हो चुकी थी। लेकिन अब प्रशासनिक और राजनीतिक कारणों के चलते यह सम्मेलन नेपाल की धरती पर आयोजित नहीं किया जाएगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सबसे पहला आयोजन वर्ष 1977 में स्विट्जरलैंड देश में किया गया था। इसके बाद से यह दुनिया के कई अन्य बड़े देशों जैसे कि ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी, जापान, नॉर्वे, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड, कनाडा, मंगोलिया, फ्रांस और चेक गणराज्य में सफलतापूक आयोजित किया जा चुका है। लेकिन नेपाल देश में इस तरह के बड़े सम्मेलन का आयोजन इतिहास में पहली बार ही प्रस्तावित किया गया था, जो अब चीन के भारी दबाव और नेपाल सरकार के हस्तक्षेप के कारण रद्द हो चुका है।