नेपाल-चीन बॉर्डर पर भारी तबाही, बाढ़ और भूस्खलन से 384 लोग हुए लापता, कई भारतीय भी शामिल.

Aanya26 August 20263 min read69 viewsEnglish
नेपाल-चीन बॉर्डर पर भारी तबाही, बाढ़ और भूस्खलन से 384 लोग हुए लापता, कई भारतीय भी शामिल.

नेपाल और चीन के बॉर्डर वाले इलाके में कुदरत का बड़ा कहर देखने को मिला है, जहां भयानक बाढ़ और भूस्खलन की वजह से कम से कम 384 यात्री लापता बताए जा रहे हैं। इस भयंकर आपदा में विदेशी नागरिकों के साथ-साथ कई स्थानीय लोग भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिसके बाद से प्रशासन और बचाव टीमों ने राहत कार्यों को तेज कर दिया है। नेपाल टूरिज्म बोर्ड के मुताबिक, लापता लोगों में 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं, जिनकी तलाश के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

कहाँ और कैसे आई यह भयंकर आपदा

यह पूरा हादसा बुधवार, 26 अगस्त 2026 को नेपाल के रसुवा जिले और चीन के तिब्बत से लगे बॉर्डर के पास हुआ। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, सुबह करीब 8:37 बजे स्थानीय समय पर आए एक भूकंप की वजह से बड़ा हिमस्खलन यानी एवरेस्ट स्लाइड हुआ, जिसके ठीक बाद सुबह करीब 9:00 बजे नदियों में भारी बाढ़ आ गई। इस तबाही की मुख्य चपेट में भोटे कोशी, त्रिशूली, नारायणी और ल्हेंडे खोला नदियां आईं, जिनके उफान ने आसपास के इलाकों को पूरी तरह डुबो दिया। इस आपदा की वजह से अब तक 8 से 19 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि एक दर्जन से ज्यादा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है, जिनकी कुल क्षमता 354 मेगावाट थी।

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लापता लोगों में भारी संख्या में भारतीय नागरिक शामिल

इस भीषण हादसे में जिन विदेशी नागरिकों के लापता होने की खबर सामने आई है, उनमें भारत के लोग भी बड़ी संख्या में हैं। लापता लोगों में 105 भारतीय पर्यटक और 37 नॉन-रेसिडेंट इंडियन (NRIs) शामिल हैं। इसके अलावा 17 मलेशियाई, 12 ब्रिटिश, 4 दक्षिण अफ्रीकी, 3 अमेरिकी, 1 ऑस्ट्रेलियाई और 1 डच नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि 111 अन्य लोगों की राष्ट्रीयता की अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने तिब्बत के ग्यािरोंग काउंटी में भी भारी नुकसान और लोगों के लापता होने की पुष्टि की है, जहां मडस्लाइड की वजह से रास्ते, बिजली और संचार संपर्क पूरी तरह कट चुके हैं।

बचाव कार्य और प्रशासनिक कदम

प्रभावित इलाकों में नेपाल आर्मी, आर्मड पुलिस फोर्स और नेपाल पुलिस द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। हालांकि, आर्मी के प्रवक्ता राजा राम बसनेत ने जानकारी दी है कि पानी का स्तर बहुत ज्यादा होने और खराब मौसम के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों जैसे स्यप्रू बेसी और तिमुरे में हेलिकॉप्टरों को उतारना संभव नहीं हो पा रहा है। जिला प्रशासक नरेंद्र पियारियार ने भोटे कोशी नदी के किनारों पर रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने का आदेश दिया है। इस बीच, नेपाल सरकार के प्रवक्ता सास्मित पोखरेल ने आधिकारिक तौर पर भारत और चीन से मदद की गुहार लगाई है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह से फोन पर बातचीत कर गहरी संवेदना व्यक्त की है और हरसंभव मानवीय सहायता देने का आश्वासन दिया है, जिसके तहत बिहार में भारत की एनडीआरएफ टीम को भी पूरी तरह तैयार रखा गया है।

आपातकालीन संपर्क और सहायता

नेपाल टूरिज्म बोर्ड ट्रेवल एजेंसियों और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर लापता लोगों की सूची की पुष्टि करने में जुटा हुआ है। आम लोगों की मदद और जानकारी के लिए कई इमरजेंसी नंबर जारी किए गए हैं, जिसमें टोल-फ्री नंबर 1234, हॉटलाइन नंबर 1144 और टूरिस्ट पुलिस लाइन नंबर 9851289445 शामिल हैं। इसके अलावा काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने भी भारतीय नागरिकों के लिए अलग से इमरजेंसी संपर्क नंबर उपलब्ध कराए हैं। तेज हवाओं और उफनती नदियों जैसी मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद ड्रोन और सूंघने वाले कुत्तों की मदद से खोज और बचाव अभियान अभी भी लगातार जारी है।

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