नेपाल में सरकार बने पांच महीने बीते, लेकिन 31 में से 21 राजदूतावास अब तक हैं राजदूतविहीन

नेपाल में नई सरकार के गठन को करीब पांच महीने पूरे होने वाले हैं, लेकिन इसके बावजूद विदेशों में रिक्त पड़े नेपाली राजनयिक मिशनों में राजदूतों की नियुक्ति अब तक पूरी नहीं हो पाई है। देश के कुल 31 राजदूतावासों में से इस समय 21 राजदूतावास पूरी तरह से राजदूतविहीन चल रहे हैं, जिससे कूटनीतिक कामकाज पर असर पड़ रहा है। लंबे समय से पद खाली रहने की वजह से कई मिशन इस समय केवल कार्यवाहक प्रमुखों के भरोसे ही अपना काम चला रहे हैं, जो देश के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है।
राजदूतों की नियुक्ति प्रक्रिया में क्यों हो रही है देरी
सरकार की तरफ से पहले कुल 13 देशों में खुली प्रतिस्पर्धा के आधार पर नए राजदूतों की नियुक्ति करने के लिए आवेदन मंगाए गए थे, लेकिन यह पूरी चयन प्रक्रिया अभी तक किसी ठोस निर्णय तक नहीं पहुंच पाई है। इसके अलावा दुनिया के सात अन्य देशों में भी नई नियुक्तियों को लेकर पूरी तरह से अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। जानकारों और विशेषज्ञों का साफ तौर पर यह कहना है कि राजदूतों की लगातार अनुपस्थिति की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेपाल की विदेश नीति और विभिन्न देशों में उसका मजबूत कूटनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर होता जा रहा है।
विदेशों में नेपाली मिशनों का कुल आंकड़ा
अगर नेपाल के कुल राजनयिक तंत्र की बात की जाए तो विदेशों में उसके कुल 31 राजदूतावास संचालित होते हैं, जिनमें संयुक्त राष्ट्र के लिए बनाए गए महत्वपूर्ण स्थायी मिशन भी शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न देशों में आठ महावाणिज्य दूतावास भी काम करते हैं। बीते वित्त वर्ष तक विदेशों में कुल 34 राजदूतावास और 10 महावाणिज्य दूतावास हुआ करते थे, लेकिन प्रशासनिक कारणों से तीन राजदूतावासों और दो महावाणिज्य दूतावासों को बंद करने की पूरी प्रक्रिया इस समय चल रही है।
किन देशों में खाली पड़े हैं राजदूतों के पद
दक्षिण अफ्रीका, डेनमार्क और ब्राजील में स्थित नेपाली राजदूतावासों के साथ-साथ चीन के छेंगदू और अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित महावाणिज्य दूतावासों को अलग रखने के बाद, बाकी बचे सभी मिशनों में से 21 राजदूतावास ऐसे हैं जहां राजदूत का मुख्य पद खाली है। इनमें से 11 राजदूतावास पिछले साल नवंबर महीने के अंत से और छह राजदूतावास इस साल अप्रैल महीने से पूरी तरह राजदूतविहीन स्थिति में हैं। इसके अलावा, अपना कार्यकाल सफलता से पूरा करके नेपाल वापस लौटे छह करियर राजदूत भी अब सरकार के अगले आधिकारिक फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
प्रमुख देशों की सूची जहां पद हैं रिक्त
भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, बहरीन, बांग्लादेश, बेल्जियम, कनाडा, मिस्र, फ्रांस, जर्मनी, इजरायल, जापान, दक्षिण कोरिया, कुवैत, मलेशिया, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, पुर्तगाल, कतर, रूस, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, यूएई और स्पेन जैसे महत्वपूर्ण देशों में स्थित नेपाली राजदूतावासों में भी राजदूतों के पद लंबे समय से खाली पड़े हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र के स्थायी मिशन अमेरिका के न्यूयॉर्क, स्विट्जरलैंड के जेनेवा और ऑस्ट्रिया के वियना में काम कर रहे हैं।
राजनीतिक फेरबदल और सत्ता साझेदारी का असर
राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर डालें तो देश में जेन-जी आंदोलन के बाद बनी पुरानी चुनावी सरकार ने पिछले साल नवंबर महीने में कुल 11 देशों में कार्यरत नेपाली राजदूतों को वापस बुलाने का बड़ा फैसला लिया था। इसके बाद प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में 27 मार्च को नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद छह अन्य स्थानों से भी राजदूतों को वापस बुला लिया गया था। उस समय इन सभी राजदूतों की नियुक्तियां नेपाली कांग्रेस, एमाले और नेकपा दलों के बीच आपसी सत्ता-साझेदारी के फार्मूले के तहत की गई थीं, जिसका खामियाजा अब कूटनीतिक मोर्चे पर भुगतना पड़ रहा है।