नेपाल में भीषण बाढ़ और तबाही के बाद भारत, चीन और विश्व बैंक ने बढ़ाई मदद के हाथ

Praggya Singh sabal26 August 20263 min read53 viewsIndia
नेपाल में भीषण बाढ़ और तबाही के बाद भारत, चीन और विश्व बैंक ने बढ़ाई मदद के हाथ

पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में आई भयंकर आपदा के बाद अब राहत और बचाव कार्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग मिलने लगा है। नेपाल की प्रसिद्ध भोटेकोशी नदी में बुधवार सुबह अचानक से पानी का स्तर बहुत बढ़ गया और एक भयंकर बाढ़ आ गई, जिसकी चपेट में आने से अब तक 22 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इस कुदरती हादसे के बाद से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस आपदा के बाद से 105 भारतीयों समेत कुल 400 से ज्यादा पर्यटक लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय संगठनों और पड़ोसी देशों की मदद की पेशकश

आपदा की इस घड़ी में नेपाल की मदद के लिए भारत, चीन और विश्व बैंक जैसे बड़े नाम तुरंत आगे आए हैं। बाढ़ की खबर सामने आने के तुरंत बाद सुबह 10:35 बजे नेपाल मामलों को देखने वाले विश्व बैंक के राष्ट्रीय निदेशक डेविड सिस्लेन ने नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले से फोन पर सीधी बातचीत की। वित्त मंत्री के सचिवालय से मिली जानकारी के मुताबिक, विश्व बैंक ने विभिन्न स्रोतों से आपातकालीन सहायता के रूप में लगभग 2,500 करोड़ नेपाली रुपये यानी 25 अरब रुपये तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की पूरी संभावना जताई है ताकि देश में राहत और पुनर्निर्माण के काम तेजी से किए जा सकें।

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भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा बयान

दक्षिणी पड़ोसी होने के नाते भारत ने नेपाल में बाढ़ प्रभावित लोगों तक तुरंत जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने के लिए नेपाल सरकार से सामानों की सूची मांगी है ताकि बिना किसी देरी के आवश्यक वस्तुएं वहां भेजी जा सकें। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर लंबी बातचीत की और इस बड़ी प्राकृतिक आपदा में हुई जनहानि पर गहरा शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत के आम नागरिक नेपाल के लोगों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं और भारत अपने पड़ोसी देश को हरसंभव मानवीय सहायता देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय बचाव दल नेपाल के संबंधित विभागों के साथ मिलकर राहत कार्यों में लगातार जुटे हुए हैं और आपसी तालमेल के साथ काम कर रहे हैं।

चीन की प्रतिक्रिया और स्थानीय प्रशासन के कदम

दूसरी ओर, उत्तरी पड़ोसी चीन ने भी नेपाल के लिए तत्काल नकद सहायता देने की पेशकश की है। नेपाल में चीनी राजदूत झांग माओमिंग ने वित्त मंत्री के माध्यम से नेपाल सरकार से इस सहायता राशि को भेजने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू करने का आग्रह किया है। इन सभी देशों और दातृ संस्थाओं द्वारा दिए जा रहे उदार सहयोग के आश्वासन पर नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने सभी का आभार व्यक्त किया है। वित्त मंत्री के सचिवालय के अनुसार सरकार विभिन्न सरकारी विभागों के बीच तालमेल बिठाकर इस मिलने वाली मदद को सही तरीके से जनता तक पहुंचाने के तौर-तरीकों पर गंभीरता से विचार कर रही है। आज हुई नेपाल मंत्रिपरिषद की बैठक में रसुवा, नुवाकोट और धादिङ के प्रभावित स्थानीय इलाकों को आधिकारिक तौर पर ‘विपद् संकटग्रस्त क्षेत्र’ घोषित कर दिया गया है, जिसके बाद अब देश और दुनिया भर से राहत एवं पुनर्निर्माण के लिए मदद जुटाने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है।

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