Nepal News: नेपाल के विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव गिरफ्तार, तिब्बती शरणार्थियों को फर्जी ट्रैवल डॉक्यूमेंट देने का मामला आया सामने

Aanya9 August 20263 min read69 viewsWorld
Nepal News: नेपाल के विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव गिरफ्तार, तिब्बती शरणार्थियों को फर्जी ट्रैवल डॉक्यूमेंट देने का मामला आया सामने

नेपाल की राजधानी काठमांडू से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां विदेश मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। नेपाल पुलिस के केंद्रीय अनुसंधान ब्यूरो यानी CIB ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव Pushparaj Bhattarai को उनके कार्यालय से ही हिरासत में ले लिया। अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने अपने पुराने कार्यकाल के दौरान गैर-कानूनी तरीके से तिब्बती शरणार्थियों को यात्रा दस्तावेज जारी किए थे, जिससे देश के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा मामला और कैसे खुला राज

जांच एजेंसियों के मुताबिक यह पूरा मामला वर्ष 2008 और 2009 के बीच का है, जब आरोपी पुष्पराज भट्टराई मंत्रालय के कांसुलर सेक्शन में सेक्शन ऑफिसर के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने बिना गृह मंत्रालय या आव्रजन विभाग की जरूरी मंजूरी के पांच तिब्बती शरणार्थियों को अवैध रूप से ट्रैवल डॉक्यूमेंट जारी किए थे। इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब 13 जुलाई 2011 को काठमांडू में स्थित जर्मन दूतावास ने कुछ संदिग्ध लोगों के दस्तावेजों की जांच करने का अनुरोध किया था। इसके बाद मामले की फाइल खुली और पुलिस ने अपनी जांच तेज कर दी।

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पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई कि उस दौरान आरोपी को करीब 500 खाली ट्रैवल डॉक्यूमेंट दिए गए थे, जिनमें से कुछ का गलत इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि जर्मनी जाने के लिए तीन से पांच तिब्बतियों को शरणार्थी के रूप में गलत तरीके से पहचाना गया और दस्तावेजों को मंजूरी दी गई। इस काम के लिए हर व्यक्ति ने लगभग 800,000 नेपाली रुपये बतौर रिश्वत दिए थे ताकि कागजात तैयार हो सकें और आसानी से देश से बाहर जाने की अनुमति मिल सके। महाराजगंज स्थित सेंट्रल पुलिस फोरेंसिक साइंस लैब की जांच में भी दस्तावेजों पर मिले हस्ताक्षर आरोपी के ही पाए गए, हालांकि अधिकारी इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।

अदालत की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया

जिला अटॉर्नी कार्यालय ने इस मामले में काठमांडू जिला अदालत में पिछले हफ्ते ही मामला दर्ज कराया था। नेपाल के पासपोर्ट अधिनियम 2019 के तहत यह केस दर्ज किया गया है, जिसमें अभियोजन पक्ष ने अधिकतम सजा की मांग की है। कानून के मुताबिक दोषी पाए जाने पर 1 से 3 साल की कैद, 500,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती हैं। साथ ही अधिकारियों ने उन सभी फर्जी दस्तावेजों को रद्द करने की भी मांग की है जो अवैध रूप से जारी किए गए थे।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को काठमांडू जिला अदालत में पेश किया, जहां न्यायाधीश Ashok Kumar Basnet की बेंच ने सुनवाई की। अदालत ने इस मामले में आरोपी को 10,000 रुपये के मुचलके पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी Hindusthan Samachar के माध्यम से सामने आई है, जिसमें प्रशासन और जांच एजेंसियों की भूमिका को प्रमुखता से दिखाया गया है। भ्रष्टाचार और फर्जी दस्तावेजों के इस मामले की जांच अभी जारी है ताकि इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में भी पुख्ता जानकारी जुटाई जा सके।

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