नेपाल में विदेशी व्यापार का हाल, पहले महीने में 35 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज.

नेपाल के आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ चालू वित्त वर्ष के पहले महीने में देश के कुल विदेशी व्यापार में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। सीमा शुल्क विभाग द्वारा जारी किए गए शुरुआती आंकड़ों के अनुसार मध्य जुलाई से मध्य अगस्त 2026 के बीच नेपाल का कुल विदेशी व्यापार 35.44 प्रतिशत बढ़कर सीधे 2 खरब 26 अरब 14 करोड़ नेपाली रुपये पर पहुंच गया है।
चालू वित्त वर्ष के आंकड़े और पिछले साल की तुलना
अगर पिछले वित्त वर्ष यानी 2025/26 की इसी अवधि की बात करें तो कुल व्यापार का यह आंकड़ा मात्र 1 खरब 66 अरब 97 करोड़ रुपये था। इस बार आंकड़े काफी तेजी से ऊपर गए हैं जिससे साफ पता चलता है कि नेपाल का आयात और निर्यात दोनों ही क्षेत्रों में कारोबार ने रफ्तार पकड़ी है। हालांकि इस दौरान देश का आयात भी काफी ज्यादा बढ़ा है जिससे व्यापार घाटे पर भी असर पड़ा है।
आयात और निर्यात की पूरी स्थिति
सीमा शुल्क विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक समीक्षा अवधि में नेपाल का आयात 31.04 प्रतिशत बढ़कर 1 खरब 87 अरब 44 करोड़ रुपये हो गया है। बीते वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आयात 1 खरब 43 अरब 4 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ निर्यात के मोर्चे पर और भी चौकाने वाले आंकड़े आए हैं जहाँ कुल निर्यात में पूरे 61.72 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
पिछले वित्त वर्ष के पहले महीने में नेपाल से कुल 23 अरब 93 करोड़ रुपये का सामान विदेशों में भेजा गया था, जो बढ़कर मध्य जुलाई से मध्य अगस्त 2026 के दौरान 38 अरब 70 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। निर्यात में इतनी बड़ी तेजी आना नेपाल के कारोबार के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
व्यापार घाटा और अनुपात में बदलाव
भले ही देश से होने वाले निर्यात में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन आयात का आंकड़ा बहुत ज्यादा होने के कारण नेपाल का कुल व्यापार घाटा 24.88 प्रतिशत बढ़कर 1 खरब 48 अरब 73 करोड़ रुपये हो गया है। पिछले साल की समान अवधि में यह व्यापार घाटा 1 खरब 19 अरब 10 करोड़ रुपये था। इसके बावजूद राहत की बात यह है कि आयात-निर्यात के अनुपात में 1.97 प्रतिशत का सुधार देखने को मिला है और यह अनुपात 5.9 से घटकर अब 4.84 पर आ गया है। इसके अलावा कुल विदेशी व्यापार में निर्यात की हिस्सेदारी भी बढ़कर 17.11 प्रतिशत हो गई है, जबकि पिछले साल यह 14.33 प्रतिशत थी। वहीं आयात की हिस्सेदारी 85.67 प्रतिशत से घटकर अब 82.89 प्रतिशत पर आ गई है।