Nepal News: नेपाल में सरकारी नीतियों से असंतुष्ट नौकरशाहों के धड़ाधड़ इस्तीफे, सचिव स्तर के अधिकारियों ने छोड़ा पद

नेपाल में राजनीतिक बदलाव के बाद प्रशासनिक महकमे में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में दो-तिहाई बहुमत की सरकार बनने के बाद से सिविल सर्विस कर्मचारियों के इस्तीफे देने का सिलसिला तेजी से बढ़ गया है। सरकार की तरफ से लाई जा रही नई नीतियों और काम करने के तौर-तरीकों से नाराज होकर सचिव स्तर से लेकर निचले प्रशासनिक स्तर तक के अधिकारी अपने पदों को छोड़ रहे हैं, जिससे पूरे देश में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।
प्रमुख सचिवों ने दिए इस्तीफे
मिली जानकारी के मुताबिक, 12 अगस्त को काठमांडू में बड़े प्रशासनिक फेरबदल और इस्तीफे का दौर देखने को मिला। सूचना एवं संचार मंत्रालय के सचिव डॉ. कमलप्रसाद पोखरेल और प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय के सचिव बाबूराम अधिकारी ने मंगलवार को अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। सरकारी प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने मीडिया को बताया कि मंगलवार को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में इन दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफे को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है।
विशेष बात यह है कि डॉ. कमलप्रसाद पोखरेल का मात्र 13 दिन पहले ही सूचना तथा संचार मंत्रालय में तबादला किया गया था। प्रशासनिक नियमों के अनुसार उनकी सेवा अवधि अभी करीब एक वर्ष से अधिक बाकी थी। इस मंत्रालय में आने से पहले वह राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के प्रमुख सांख्यिकी अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वहीं दूसरी ओर, प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय के सचिव बाबूराम अधिकारी इसी साल अगस्त महीने के अंतिम सप्ताह में अनिवार्य सेवानिवृत्ति यानी रिटायर होने वाले थे, लेकिन उन्होंने समय से पहले ही पद छोड़ना उचित समझा।
नए सेवा विधेयक से बढ़ा कर्मचारियों में असंतोष
कर्मचारियों के बीच नाराजगी की मुख्य वजह सरकार द्वारा लाया जा रहा संघीय निजामती सेवा विधेयक का नया मसौदा है। इस नए विधेयक को आगे बढ़ाए जाने के बाद से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। सरकार की इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत उन कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से रिटायर करने की योजना बनाई जा रही है, जिनकी आयु 55 वर्ष पूरी हो चुकी है और जिन्होंने अपनी सेवा के 30 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस नियम के सामने आने के बाद से कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है, जिसके चलते वे लगातार इस्तीफे सौंप रहे हैं।
हालात यह हो गए हैं कि अब तक देश भर में करीब एक दर्जन सह सचिव, लगभग तीन दर्जन उप सचिव और इसके अलावा बड़ी संख्या में अन्य प्रशासनिक कर्मचारी अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। इतने बड़े पैमाने पर वरिष्ठ अधिकारियों के लगातार पद छोड़ने से सरकारी कामकाज पर बुरा असर पड़ रहा है। प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया भी धीमी हो गई है, जिसको लेकर अब आम जनता और राजनीतिक गलियारों में बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं कि आखिर सरकार इस स्थिति से कैसे निपटेगी।