लिपुलेख के रास्ते भारत-चीन व्यापार पर नेपाल ने जताई आपत्ति, कहा यह कदम स्वीकार्य नहीं

भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे के जरिए पारंपरिक सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने पर नेपाल ने अपनी चिंता व्यक्त की है। नेपाल सरकार का कहना है कि उनकी सहमति के बिना यह फैसला लिया गया है, जो उन्हें मंजूर नहीं है। इस क्षेत्र पर नेपाल लगातार अपना दावा करता रहा है।
विदेश मंत्रालय ने जताया विरोध
नेपाली विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि नेपाल की संप्रभुता से जुड़े किसी भी मामले में उसे शामिल करना जरूरी है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसे एक गंभीर विषय बताया है और कहा कि सरकार उचित मंचों पर इस मुद्दे को उठाएगी। नेपाल के अनुसार लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी उसके अभिन्न अंग हैं।
विवाद का पुराना इतिहास
भारत और चीन के बीच लिपुलेख के जरिए व्यापार 1992 से हो रहा था, जो 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण बंद कर दिया गया था। भारत का रुख साफ है कि लिपुलेख उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा है। वर्ष 2020 में जब भारत ने लिपुलेख को जोड़ने वाली सड़क का उद्घाटन किया था, तब भी नेपाल ने अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी कर विरोध दर्ज कराया था। इस पूरे घटनाक्रम की अधिक जानकारी हिन्दुस्थान समाचार के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है।