नेपाल संसद में हंगामा, स्पीकर ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को सदन में आकर जवाब देने का दिया सख्त निर्देश

Nura Basta17 August 20263 min read56 viewsWorld
नेपाल संसद में हंगामा, स्पीकर ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को सदन में आकर जवाब देने का दिया सख्त निर्देश

नेपाल की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिसके चलते देश के प्रधानमंत्री को सीधे तौर पर संसद में आकर जवाब देने के लिए कहा गया है। नेपाली संसद के अध्यक्ष यानी स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को प्रतिनिधि सभा की बैठक में उपस्थित होने का कड़ा निर्देश जारी किया है। स्पीकर ने साफ शब्दों में कहा है कि प्रधानमंत्री सदन में आएं और सांसदों द्वारा उठाए जा रहे तमाम सवालों का खुलकर और नियमानुसार जवाब दें। यह मामला देश की राजनीति में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है और विपक्षी दल लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे सदन की कार्यवाही पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है।

विपक्षी दलों का जोरदार हंगामा और विरोध प्रदर्शन

सोमवार को जैसे ही नेपाली प्रतिनिधि सभा की बैठक शुरू हुई, वैसे ही विपक्षी दलों के तमाम सांसद अपनी-अपनी सीटों से खड़े हो गए और सदन में हंगामा करने लगे। सांसदों ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि प्रधानमंत्री उनकी ओर से पूछे जा रहे जरूरी सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं। सदन के भीतर बढ़ते तनाव को देखते हुए स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल ने स्थिति को संभाला और कहा कि उन्होंने इस पूरे विषय को बेहद गंभीरता से लिया है। स्पीकर ने सदन को बताया कि पिछले काफी समय से प्रतिनिधि सभा नियमावली 2073 के नियम 56 के तहत प्रधानमंत्री या फिर उनके कार्यक्षेत्र से जुड़े मामलों पर सवाल-जवाब करने की मांग लगातार की जा रही थी, जिसे लेकर विपक्षी सदस्यों ने अपनी नाराजगी जताई है।

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भारत की जमीन को लेकर दिए गए बयान पर बवाल

असली विवाद की शुरुआत प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के उस बयान से हुई है जो उन्होंने एक पिछली बैठक के दौरान दिया था। प्रधानमंत्री शाह ने संसद में सवालों के जवाब देते हुए यह कह दिया था कि नेपाल ने भी भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है। इस बयान के सामने आते ही देश में सियासी भूचाल आ गया और विपक्षी सांसद लगातार इस पर अपना विरोध जता रहे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि प्रधानमंत्री का यह बयान देश की स्थिति के खिलाफ है और उन्हें संसद के पटल पर आकर इस मामले पर पूरी और स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए ताकि जनता के सामने सच आ सके। विपक्षी सांसद चाहते हैं कि प्रधानमंत्री इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी स्थिति साफ करें और सदन को बताएं कि उनके इस बयान के पीछे का असल आधार क्या था।

नियमों के तहत हर महीने होता है सवाल-जवाब का कार्यक्रम

नेपाली प्रतिनिधि सभा की नियमावली के नियमों के अनुसार यह साफ प्रावधान किया गया है कि हर महीने के पहले सप्ताह में प्रधानमंत्री के साथ सांसदों का एक विशेष प्रश्नोत्तर कार्यक्रम आयोजित किया जाना चाहिए। इसी तय व्यवस्था का हवाला देते हुए सांसद लगातार प्रधानमंत्री की संसद में उपस्थिति की मांग कर रहे हैं। सांसदों का तर्क है कि जब नियम साफ हैं और हर महीने प्रधानमंत्री को सदन में आकर सवालों के जवाब देने हैं, तो फिर इस प्रक्रिया से दूरी क्यों बनाई जा रही है। स्पीकर अर्याल ने भी नियमावली के नियम 56, 57, 58, 59 और 60 का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री को निर्देश दिया है कि वह सदन में आएं और इन सभी नियमों के दायरे में रहकर सदस्यों के पूछे गए तमाम प्रश्नों के उत्तर दें, ताकि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से आगे बढ़ सके और जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को उनके सवालों के सही जवाब मिल सकें।

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