Nepal Flood News: नेपाल के रसुवा में भीषण बाढ़ से 300 मेगावाट से अधिक की जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान

नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत की तरफ से आई भयानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिससे त्रिशूली नदी के किनारे बनी 300 मेगावाट से ज्यादा क्षमता वाली जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। ऊर्जा मंत्रालय ने इस संबंध में प्रारंभिक आकलन जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में निर्माणाधीन और पहले से चल रही दोनों तरह की बिजली परियोजनाएं आ गई हैं। इस भारी तबाही के बाद पूरे इलाके में बिजली की सप्लाई पूरी तरह से ठप हो गई है, जिससे आम जनजीवन पर बहुत बुरा असर पड़ा है और लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हो गए हैं।
इन बड़ी परियोजनाओं को पहुंचा भारी नुकसान
सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ के कारण कई प्रोजेक्ट्स के पावर हाउस और सब-स्टेशन पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं। ऊर्जा मंत्रालय ने जिन प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की बात कही है, उनमें रसुवागढ़ी (111 मेगावाट), चिलिमे (22 मेगावाट), त्रिशूली-3 ए (60 मेगावाट), त्रिशूली-3 बी (37 मेगावाट), मैलुङ (14 मेगावाट) और त्रिशूली-बेनीघाट (35 मेगावाट) शामिल हैं। इसके अलावा 57 मेगावाट क्षमता वाली साञ्जेन (अपर) और साञ्जेन जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी क्षति पहुंची है, जिससे देश के बिजली सेक्टर को बहुत बड़ा झटका लगा है।
अधिकारियों द्वारा नुकसान का आकलन जारी
ऊर्जा मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ के सचिवालय के एक जिम्मेदार अधिकारी ने मीडिया को जानकारी दी है कि अभी सिर्फ शुरुआती आकलन सामने आया है और असल नुकसान का आधिकारिक ब्यौरा जुटाया जा रहा है। अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि इन प्रभावित जगहों पर काम करने वाले कर्मचारी सुरक्षित हैं या नहीं और उनकी मौजूदा स्थिति क्या है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अलग-अलग बिजली घरों और ट्रांसमिशन लाइनों को भी इस आपदा में गहरी चोट पहुंची है। प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ का सीधा असर रसुवागढ़ी, चिलिमे, त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्लांट के साथ-साथ त्रिशूली-3 ‘बी’ हब के 220 केवी सबस्टेशन पर भी पड़ा है। इसके अलावा त्रिशूली और देवीघाट जलविद्युत केंद्रों समेत कई स्थानीय वितरण प्रणालियां भी बाढ़ के पानी और मलबे की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिन्हें ठीक करने में अभी काफी समय लग सकता है।