नेपाल में बड़ा राजनीतिक ड्रामा, दो-तिहाई बहुमत वाली सरकार कोरम पूरा न होने से नहीं पेश कर पाई महत्वपूर्ण विधेयक

Aanya15 August 20264 min read68 viewsWorld
नेपाल में बड़ा राजनीतिक ड्रामा, दो-तिहाई बहुमत वाली सरकार कोरम पूरा न होने से नहीं पेश कर पाई महत्वपूर्ण विधेयक

नेपाल की राजधानी काठमांडू से एक बड़ी और हैरान करने वाली राजनीतिक खबर सामने आई है, जहाँ भारी-भरकम बहुमत वाली सरकार को संसद में फजीहत का सामना करना पड़ा है। नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी यानी RSP के पास प्रतिनिधि सभा में लगभग दो-तिहाई बहुमत है, लेकिन इसके बावजूद मंगलवार को संसद में न्यूनतम एक-चौथाई सांसद भी उपस्थित नहीं हो सके। कोरम पूरा न होने के कारण प्रतिनिधि सभा की महत्वपूर्ण बैठक में एक जरूरी विधेयक पेश ही नहीं किया जा सका, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मिनटों की चर्चा के बाद टली कार्यवाही

मिली जानकारी के अनुसार, उद्योग मंत्री गौरी यादव ने खनिज पदार्थ विधेयक पर विचार किए जाने का प्रस्ताव सदन में पेश किया था। इस बेहद अहम प्रस्ताव पर रात करीब 11:15 बजे तक लंबी चर्चा चली। जब चर्चा का दौर समाप्त हुआ और इस प्रस्ताव को अंतिम निर्णय के लिए सदन के सामने प्रस्तुत किया जाना था, उस वक्त सदन में आवश्यक गणपूरक संख्या यानी कोरम ही पूरा नहीं था। यही वजह रही कि स्पीकर को मजबूरन बैठक को बीच में ही स्थगित करना पड़ा। राजनीतिक गलियारों में इस घटना की खासी चर्चा हो रही है और इसे सत्तापक्ष की एक बड़ी लापरवाही के रूप में देखा जा रहा है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

सांसदों की गैरहाजिरी और 'हाजिर करके टाप कसना'

संसद सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई है कि कई सांसदों ने सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले अपनी उपस्थिति तो दर्ज करा दी, लेकिन उसके तुरंत बाद वे सदन से बाहर निकल गए। नेपाली राजनीतिक भाषा और स्थानीय संस्कृति में इस तरह की प्रवृत्ति को 'हाजिर करके टाप कसना' कहा जाता है। यदि यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव उस समय सदन में स्वीकृत हो जाता, तो सभी सांसदों को इस विधेयक में अपने संशोधन प्रस्ताव दर्ज कराने के लिए 72 घंटे का कुल समय मिलता। अब इस पूरे मामले पर आगे की प्रक्रिया आगामी 17 अगस्त को आयोजित होने वाली प्रतिनिधि सभा की अगली बैठक में ही आगे बढ़ सकेगी।

संविधान के नियमों के तहत नहीं जुटा सके न्यूनतम सांसद

गौर करने वाली बात यह है कि बीते 5 मार्च 2026 को हुए प्रतिनिधि सभा के चुनाव में RSP को शानदार दो-तिहाई बहुमत मिला था, जिसके बाद यह पहला मौका था जब मंगलवार को सदन में आवश्यक गणपूरक संख्या तक नहीं पहुंच पाई। नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 94 के अनुसार, प्रतिनिधि सभा की किसी भी बैठक को चलाने और निर्णय लेने के लिए कम से कम 69 सांसदों की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य होती है। लेकिन जब मंगलवार को सदन में सांसदों की गिनती की गई, तो उस समय केवल 61 सांसद ही मौजूद पाए गए। इस प्रकार, जरूरी संख्या से पूरे 8 सांसद कम थे, जिसके कारण कोरम का नियम टूट गया।

संसद सचिवालय और मंत्रियों के बयान

संसद सचिवालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जब बैठक की शुरुआत हुई थी, तब सदन के भीतर 220 से अधिक सांसद मौजूद थे। हालांकि, जैसे-जैसे चर्चा का समय बढ़ता गया और रात गहरी होती गई, वैसे-वैसे बड़ी संख्या में सांसद सदन छोड़कर बाहर चले गए। उद्योग मंत्री गौरी यादव ने विधेयक पर हुई चर्चा के दौरान तमाम सांसदों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब दिए और अपनी बात रखी। इसके बाद स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल ने उस प्रस्ताव को निर्णय के लिए सदन के सामने प्रस्तुत किया।

इसी बीच, नेपाली कांग्रेस के सचेतक निष्कल राई ने तुरंत कोरम पूरा नहीं होने का बड़ा मुद्दा उठाया और सदन में मौजूद सांसदों की संख्या की गिनती कराने की मांग रख दी। इसके बाद स्पीकर ने नियम के मुताबिक तीन मिनट तक लगातार घंटी बजाकर बाहर मौजूद सांसदों को सदन के अंदर बुलाया और उसके बाद विधिवत गणना कराई गई। गणना में सिर्फ 61 सांसद ही गिने गए। जरूरी 69 सांसदों का आंकड़ा पूरा न होने के कारण स्पीकर ने बैठक को तुरंत स्थगित करने की घोषणा कर दी।

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए RSP के मुख्य सचेतक कवीन्द्र बुर्लाकोटी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बैठक बहुत ज्यादा लंबी खींच जाने की वजह से कई सांसद सदन से बाहर चले गए थे, और इसी कारण से कोरम पूरा नहीं हो सका। उन्होंने अपनी पार्टी की इस चूक को स्वीकार किया और भरोसा दिलाया कि भविष्य में इस तरह की लचर स्थिति दोबारा कभी नहीं दोहराई जाएगी, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर से नेपाल की संसद में सांसदों की उपस्थिति और अनुशासन को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है।

Share:

Comments

Leave a comment