नेपाल में दो-तिहाई बहुमत वाली सरकार को लगा झटका, संसद में कोरम पूरा न होने से खनिज पदार्थ विधेयक अटका.

Nura Basta12 August 20264 min read61 viewsWorld
नेपाल में दो-तिहाई बहुमत वाली सरकार को लगा झटका, संसद में कोरम पूरा न होने से खनिज पदार्थ विधेयक अटका.

नेपाल की राजनीति में मंगलवार को एक दिलचस्प और हैरान करने वाला वाकया सामने आया जहाँ भारी-भरकम बहुमत वाली सरकार को अपने ही सांसदों की लापरवाही की वजह से किरकिरी का सामना करना पड़ा। देश की सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी यानी RSP के पास प्रतिनिधि सभा में लगभग दो-तिहाई बहुमत है लेकिन इसके बावजूद मंगलवार को संसद में जरूरी संख्या बल नहीं जुट पाया। हालात यह बन गए कि न्यूनतम एक-चौथाई सांसद भी सदन में मौजूद नहीं रह सके जिसकी वजह से एक बेहद महत्वपूर्ण विधेयक को पेश किए बिना ही बैठक को स्थगित करना पड़ गया। इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और विपक्षी दलों को भी सरकार पर सवाल उठाने का मौका मिल गया है।

क्या था पूरा मामला और कैसे टला विधेयक

मंगलवार को संसद की कार्यवाही के दौरान उद्योग मंत्री Gauri Yadav ने खनिज पदार्थ विधेयक पर विचार किए जाने का प्रस्ताव सदन के पटल पर रखा था। इस प्रस्ताव पर लंबी चर्चा चली और रात के करीब 11:15 बजे तक इस पर बातचीत होती रही। जब चर्चा पूरी हो गई और प्रस्ताव को अंतिम निर्णय के लिए पेश करने का समय आया तो सदन में अचानक सन्नाटा सा छा गया क्योंकि वहां जरूरी सांसदों की संख्या ही नहीं बची थी। नेपाली राजनीतिक भाषा में इस तरह की घटना को 'हाजिर करके टाप कसना' कहा जाता है जिसका मतलब होता है कि सांसद अपनी अटेंडेंस यानी उपस्थिति दर्ज कराने के बाद चुपचाप सदन से बाहर निकल जाते हैं। यदि यह प्रस्ताव उस समय स्वीकृत हो जाता तो सभी सांसदों को इस विधेयक में संशोधन के लिए 72 घंटे का समय मिलता लेकिन अब यह प्रक्रिया आगे बढ़ नहीं सकी।

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संविधान का नियम और सांसदों की भारी कमी

नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 94 के अनुसार प्रतिनिधि सभा की किसी भी बैठक को सुचारू रूप से चलाने के लिए कम से कम 69 सांसदों की उपस्थिति अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। लेकिन मंगलवार को जब गणना कराई गई तो सदन में केवल 61 सांसद ही मौजूद पाए गए जो कि तय संख्या से पूरे 8 सांसद कम थे। संसद सचिवालय से मिली जानकारी के मुताबिक जब बैठक की शुरुआत हुई थी तब सदन के अंदर 220 से अधिक सांसद अपनी सीट पर बैठे हुए थे। लेकिन जैसे-जैसे रात गहरी होती गई और चर्चा लंबी खिंचती गई वैसे-वैसे बड़ी संख्या में सांसद सदन छोड़कर बाहर चले गए। उद्योगमंत्री गौरी यादव ने विधेयक पर हुई बहस के दौरान सभी विपक्षी और सत्तापक्ष के सांसदों द्वारा उठाए गए सवालों के बड़े ही विस्तार से जवाब दिए थे और इसके बाद स्पीकर Dol Prasad Aryal ने प्रस्ताव को वोटिंग या निर्णय के लिए आगे बढ़ाया था।

विपक्ष ने पकड़ा कोरम का पेंच

जैसे ही स्पीकर ने प्रस्ताव को आगे बढ़ाया वैसे ही नेपाली कांग्रेस के सचेतक Nishkal Rai ने तुरंत सदन में कोरम पूरा नहीं होने का बड़ा मुद्दा उठा दिया और सांसदों की सही संख्या की गिनती कराने की मांग रख दी। नियम के मुताबिक स्पीकर ने तुरंत घंटी बजाकर तीन मिनट तक का समय दिया ताकि बाहर गए सभी सांसद दौड़कर सदन के अंदर आ जाएं और कोरम पूरा हो सके। इसके बाद जब दोबारा से गिनती कराई गई तो वहां सिर्फ 61 लोग ही गिने गए। जरूरी 69 का आंकड़ा पूरा न होने की वजह से स्पीकर के पास बैठक को तुरंत प्रभाव से स्थगित करने के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा। अब इस पूरे मामले और अधूरे पड़े प्रस्ताव पर आगे की कानूनी और विधाई प्रक्रिया आगामी 17 अगस्त को होने वाली प्रतिनिधि सभा की अगली बैठक में ही आगे बढ़ाई जाएगी।

ससत्ता पक्ष ने मानी अपनी भूल

इस पूरी किरकिरी के बाद आरएसपी यानी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के मुख्य सचेतक Kaveendra Burlakoti ने मीडिया और सदन के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने साफ तौर पर स्वीकार किया कि बैठक काफी ज्यादा लंबी चल गई थी जिसकी वजह से बहुत सारे सांसद ऊबकर या किसी अन्य कारण से सदन से बाहर चले गए थे और इसी लापरवाही के चलते कोरम पूरा नहीं हो पाया। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि भविष्य में इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना स्थिति दोबारा कभी सामने न आए, इस बात का पार्टी और उनके सभी सांसद पूरी तरह से ध्यान रखेंगे। इस घटना के बारे में अधिक जानकारी आप Hindusthan Samachar पर जाकर पढ़ सकते हैं।

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