Nepal News: नेपाल में वरिष्ठ पत्रकार की आधी रात को हुई गिरफ्तारी, सुबह घर और दफ्तर पर छापे से मचा हड़कंप.

पड़ोसी देश नेपाल से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जहां एक वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया संस्थान के संपादक को आधी रात के वक्त पुलिस ने अचानक गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद से वहां के पत्रकारों और राजनीतिक गलियारों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि गिरफ्तारी के ठीक अगले दिन सुबह उनके घर और दफ्तर पर भी भारी पुलिस बल के साथ छापेमारी की गई है। इस पूरी घटना ने देश की मौजूदा व्यवस्था और कानून के तरीकों पर कई बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं, जिसके बाद से लगातार विरोध प्रदर्शन का दौर जारी है।
जनआस्था साप्ताहिक के प्रधान संपादक हैं किशोर श्रेष्ठ
नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुई इस घटना ने तूल पकड़ लिया है। गिरफ्तार किए गए शख्स का नाम किशोर श्रेष्ठ है, जो कि चर्चित मीडिया संस्थान जनआस्था साप्ताहिक के प्रधान संपादक के रूप में कार्यरत हैं। पुलिस द्वारा उन्हें बुधवार देररात को अचानक गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद से पत्रकारों में भारी नाराजगी फैल गई। गिरफ्तारी की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में पत्रकार और मीडियाकर्मी तुरंत जिला प्रशासन कार्यालय के बाहर पहुंच गए। सभी ने मिलकर वहां रातभर धरना दिया और उनकी तत्काल रिहाई की मांग पर अड़े रहे। प्रदर्शन कर रहे पत्रकारों का साफ कहना था कि इस तरह आधी रात को किसी पत्रकार को उठाना और डराना-धमकाना पूरी तरह से तानाशाही रवैया है।
पत्रकार संगठनों का आरोप है कि हाल ही में एक समाचार प्रकाशित किया गया था, जिसके बाद से ही प्रशासन उन पर दबाव बना रहा था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस लगातार उनसे यह उगलवाने की कोशिश कर रही है कि उनके पास उस खबर का स्रोत यानी सोर्स क्या था। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि किसी प्रकाशित खबर को लेकर कोई शिकायत या आपत्ति थी, तो उसके लिए तयशुदा कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था। इस तरह से आधी रात के वक्त बिस्तर से उठाकर दबाव बनाना लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रेस की आजादी के बुनियादी उसूलों के बिल्कुल खिलाफ है।
गुरुवार सुबह घर और दफ्तर पर ताबड़तोड़ छापेमारी
मामला यहीं नहीं थमा, बल्कि रात की गिरफ्तारी के बाद गुरुवार सुबह पुलिस प्रशासन ने उनके निजी आवास और जनआस्था साप्ताहिक के मुख्य कार्यालय पर भी धावा बोल दिया। पुलिस ने दोनों जगहों पर लंबी छापेमारी की, जिससे पत्रकारों के बीच और ज्यादा दहशत और गुस्सा फैल गया। मीडियाकर्मियों का कहना है कि क्या किसी खबर को छापने के एवज में इस तरह से किसी पत्रकार के घर और मीडिया हाउस पर तालेबंदी जैसी कार्रवाई करना उचित है। इस तरह के एक्शन से साफ संदेश जा रहा है कि सरकार मीडिया की आवाज को कुचलने का प्रयास कर रही है ताकि कोई भी सच दिखाने की हिम्मत न जुटा सके।
आपको बता दें कि किशोर श्रेष्ठ और उनका संस्थान पहले भी कई बार विवादों के घेरे में आ चुके हैं। इससे पहले मई 2026 में भी उनसे जुड़ा एक विवादित ऑडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। उस दौरान उन पर एक बड़े राजनीतिक नेता के खिलाफ नकारात्मक समाचार प्रकाशित करने के एवज में पैसे लेने के गंभीर आरोप लगे थे। हालांकि, उस वक्त श्रेष्ठ ने उन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था और इसे उनके तथा उनके मीडिया संस्थान की छवि खराब करने की सोची-समझी साजिश करार दिया था।
विपक्ष ने सरकार को घेरा, प्रचंड ने जताया विरोध
इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद नेपाल की राजनीति में भी भूचाल आ गया है। माओवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचंड’ समेत कई बड़े विपक्षी दलों के दिग्गज नेताओं ने सरकार के इस कदम की कड़ी निंदा की है। विपक्षी नेताओं का साफ तौर पर कहना है कि केवल एक समाचार लिखने या छापने के जुर्म में किसी वरिष्ठ पत्रकार को गिरफ्तार कर लेना प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा और करारा प्रहार है। विपक्ष ने सरकार से कड़े शब्दों में यह मांग की है कि वह देश की जनता को और मीडिया को यह स्पष्ट करे कि आखिर किस कानूनी आधार पर श्रेष्ठ को पकड़ा गया और उस खबर में ऐसा कौन सा बड़ा अपराध था जिसके लिए ऐसी दमनकारी कार्रवाई करनी पड़ी।