नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर भीषण बाढ़ का तांडव, 9 लोगों की मौत और कई गांव हुए तबाह.

नेपाल और तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार, 26 अगस्त 2026 को सुबह करीब 9:15 बजे अचानक आए भीषण फ्लैश फ्लड यानी अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस भयंकर आपदा की वजह से अब तक कम से कम 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और दर्जनों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। भूटिया कोशी नदी में जलस्तर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाने के कारण यह भयानक स्थिति पैदा हुई, जिसका मुख्य कारण तिब्बत की तरफ भारी बारिश या ग्लेशियर का पिघलना माना जा रहा है। नदी का पानी तेज रफ्तार के साथ रिहायशी इलाकों में घुस गया जिससे कई गांव और जरूरी बुनियादी ढांचा पूरी तरह से नष्ट हो गए।
लापता लोगों की तलाश और राहत बचाव कार्य
इस आपदा के बाद से बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। लापता लोगों में नेपाल पुलिस के 26 जवान, रसुवा में तैनात सशस्त्र पुलिस बल के 7 सदस्य और तिमुरे स्थित रसुवा कस्टम ऑफिस के 14 कर्मचारी शामिल हैं। बचाव दलों ने अपनी जान पर खेलकर रसुवागढी हाइड्रोपावर डैम इलाके से सुरक्षित रूप से 55 लोगों को बाहर निकाल लिया है। हालांकि, नदी में पानी का बहाव अभी भी बहुत तेज बना हुआ है, जिसकी वजह से राहत कार्यों में लगे हेलीकॉप्टरों को लैंडिंग करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बुनियादी ढांचे और बिजली उत्पादन को भारी नुकसान
इस कुदरती कहर ने इलाके के इंफ्रास्ट्रक्चर को बुरी तरह से तहस-नहस कर दिया है। त्रिशूल नदी पर बने कम से कम आधे दर्जन से ज्यादा पुल और रसुवागढी में हाल ही में तैयार किया गया फ्रेंडशिप ब्रिज पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नेपाल बिजली प्राधिकरण के अनुसार, इस आपदा की वजह से लगभग 430 मेगावाट की बिजली उत्पादन क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में बिजली की सप्लाई ठप हो गई है। इसके अलावा, नेपाली हिस्से में आए एक बड़े भूस्खलन यानी मडस्लाइड के कारण चीन के ग्याजोंग पोर्ट पर भी असर पड़ा है और तिब्बत के शिगात्से इलाके में सड़क मार्ग, संचार सेवाएं और बिजली व्यवस्था बुरी तरह से बाधित हो गई है।
प्रशासन और सरकार द्वारा उठाए गए सख्त कदम
हालात की गंभीरता को देखते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने एक आपातकालीन कैबिनेट मीटिंग बुलाई। इस बैठक में उन्होंने नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को तुरंत मैदान में उतरने का सख्त आदेश दिया। साथ ही निचले इलाकों में रहने वाले सभी नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर तुरंत चले जाने का निर्देश दिया गया। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरएमए) ने रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और गोरखा जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। रसुवा के जिला प्रशासक नरेन्द्र परियार समेत तमाम स्थानीय अधिकारी सुरक्षा कार्यों की खुद निगरानी और समन्वय कर रहे हैं। दूसरी ओर, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लापता लोगों की तलाश के लिए हरसंभव प्रयास करने और भविष्य में किसी भी तरह की दूसरी आपदा के खतरे को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया है।
यात्रा पर रोक और चेतावनी
प्रशासन की तरफ से एक औपचारिक ट्रैवल एडवाइजरी जारी की गई है, जिसके तहत लोगों को फिलहाल नुवाकोट, रसुवा या कैलाश क्षेत्र की यात्रा करने से पूरी तरह बचने की सख्त सलाह दी गई है। लगातार हो रहे भूस्खलन, बाढ़ के खतरे और चल रहे राहत अभियानों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि भूटिया कोशी नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे कम होना शुरू हो गया है, लेकिन अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।