New Zealand में बेरोजगारी ने तोड़े 11 साल के रिकॉर्ड, विदेश मंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य के विवाद को ठहराया जिम्मेदार

न्यूजीलैंड में नौकरी की तलाश कर रहे लोगों के लिए चिंता की खबर सामने आई है। जून 2026 की दूसरी तिमाही में देश की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो पिछले 11 साल में सबसे उच्च स्तर है। इस आंकड़े को देखकर हर कोई हैरान है क्योंकि इतनी ज्यादा बेरोजगारी का स्तर साल 2015 की तीसरी तिमाही के बाद पहली बार देखा गया है। सरकार और आम जनता दोनों ही इस स्थिति पर अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं।
पेटर्स ने बताई संघर्ष की भूमिका
न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री Winston Peters ने 5 अगस्त 2026 को इस समस्या के पीछे मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में चल रहे विवाद को माना है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए बताया कि इस संघर्ष के कारण ईंधन (fuel) की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर बिजनेस के खर्चों पर पड़ा है, जिससे महंगाई बढ़ी है और अंत में लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। Statistics New Zealand (Stats NZ) की रिपोर्ट के अनुसार, पिछली तिमाही में यह दर 5.4 प्रतिशत थी जो अब बढ़कर 5.6 प्रतिशत हो गई है।
बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी का आंकड़ा
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, बेरोजगार लोगों की संख्या अब बढ़कर 171,000 हो गई है, जबकि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 164,000 था। केवल बेरोजगारी ही नहीं, बल्कि 'अंडरयूटिलाइजेशन' यानी काम की कमी का शिकार होने वाले लोगों का आंकड़ा भी 12.9 प्रतिशत से बढ़कर 13.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
| विवरण | आंकड़ा (जून 2026) |
|---|---|
| बेरोजगारी दर | 5.6% |
| बेरोजगार व्यक्तियों की संख्या | 171,000 |
| अंडरयूटिलाइजेशन दर | 13.8% |
| पिछली तिमाही की बेरोजगारी | 5.4% |
वित्त मंत्री Nicola Willis ने इस तिमाही को काफी कठिन बताया है। वहीं, लेबर पार्टी और ग्रीन पार्टी के नेताओं ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर कड़े सवाल उठाए हैं। NZ Council of Trade Unions की अध्यक्ष Sandra Grey का कहना है कि लेबर मार्केट स्पष्ट रूप से संकट के दौर से गुजर रहा है। दूसरी ओर, Reserve Bank of New Zealand (RBNZ) लगातार ब्याज दरों को बढ़ाने का काम कर रही है ताकि बढ़ती महंगाई पर काबू पाया जा सके। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में जारी विवाद से पहले ही वहां के बाजार में बेरोजगारी के संकेत दिखने लगे थे।