UAE में जहाज हमलों के बाद कच्चा तेल हुआ महंगा, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में थमी जहाजों की आवाजाही.

Nura Basta17 August 20262 min read72 viewsUAE
UAE में जहाज हमलों के बाद कच्चा तेल हुआ महंगा, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में थमी जहाजों की आवाजाही.

दुनियाभर में कच्चे तेल के दाम अचानक काफी ज्यादा बढ़ गए हैं क्योंकि खाड़ी के महत्वपूर्ण इलाके स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस समुद्री रास्ते पर लगातार हो रहे हमलों की वजह से हालात बहुत तनावपूर्ण हो गए हैं और इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ रहा है। आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी और सफर पर इसका असर पड़ सकता है क्योंकि तेल महंगा होने से हर चीज के दाम पर फर्क पड़ता है।

जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट

शिप ट्रैकिंग डेटा कंपनी Kpler से मिली जानकारी के मुताबिक, इस अहम जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में बहुत बड़ी गिरावट आई है। स्थिति यह है कि 16 अगस्त को इस रास्ते पर एक भी कमोडिटी जहाज दर्ज नहीं किया गया, जबकि पिछले हफ्ते यहां ठीक-ठाक जहाजों की आवाजाही थी। UAE प्रशासन ने एक ही हफ्ते के भीतर ADNOC के जहाजों पर तीन हमलों की आधिकारिक पुष्टि की है, जिसके बाद से क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर संकट बहुत ज्यादा बढ़ गया है।

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अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत रुकी

समुद्री रास्ते पर चल रहे इस तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत भी पूरी तरह से रुक गई है। दोनों देशों के बीच हुआ 60 दिन का युद्धविराम समझौता 17 अगस्त 2026 को खत्म हो गया है और इसके बाद से शांति वार्ताओं को आगे बढ़ाने को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi समेत अन्य ईरानी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि फिलहाल बातचीत को दोबारा शुरू करने को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई है।

फारस की खाड़ी को लेकर कड़े बयान

तनाव तब और ज्यादा बढ़ गया जब ईरानी सैन्य नेतृत्व की तरफ से यह बयान सामने आया कि अमेरिका को फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ईरान ने इस पूरे जलमार्ग को अपने नियंत्रण में होने की बात कही है। परमाणु और समुद्री शासन से जुड़े इस समझौते को आगे बढ़ाने में नाकामी के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर लगातार दबाव बना हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।

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