Oman और Iran का बड़ा फैसला, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में नेविगेशन बहाल करने के लिए बनाया नया फ्रेमवर्क.

ओमान और ईरान ने मिलकर दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को फिर से सुरक्षित करने के लिए एक नए फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रखा है। इस नए कदम से खाड़ी देशों के साथ-साथ ग्लोबल एनर्जी मार्केट को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि पिछले कुछ समय से क्षेत्रीय तनाव के कारण इस रास्ते पर खतरा मंडरा रहा था। इस योजना के तहत दोनों देश मिलकर एक अस्थायी शिपिंग लेन बनाएंगे और पानी के भीतर बिछाई गई माइंस यानी बारूदी सुरंगों को हटाने का काम भी शुरू करेंगे ताकि व्यापारिक जहाजों को आने-जाने में कोई दिक्कत न हो।
डिप्लोमैटिक बातचीत के बाद सामने आया प्रस्ताव
यह महत्वपूर्ण फैसला हाल ही में हुई कई दौर की उच्च स्तरीय बैठकों के बाद सामने आया है, जिसमें ओमान के विदेश मंत्री Sayyid Badr bin Hamad Al Busaidi और ईरान के विदेश मंत्री Dr. Seyed Abbas Araghchi ने अहम भूमिका निभाई। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि इस संकट को सुलझाने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम करना जरूरी है ताकि क्षेत्र में शांति लौट सके। आपको बता दें कि इसी बीच ओमान के तट के पास एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल की वजह से एक ऑयल टैंकर के क्षतिग्रस्त होने की खबर भी सामने आई, जिससे यह साफ होता है कि इस इलाके में अभी भी खतरे पूरी तरह से टले नहीं हैं और सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना बहुत जरूरी है।
अमेरिका और अन्य देशों की प्रतिक्रिया
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 25 अगस्त 2026 को यह दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से सभी माइंस को हटा दिया गया है और उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका की स्पेस फोर्स इस पूरे समुद्री रास्ते पर लगातार नजर रख रही है। हालांकि, ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि पानी से माइंस हटाने का काम केवल ईरान द्वारा ही किया जाना चाहिए। इसके अलावा, ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने भी पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के साथ इस मार्ग को दोबारा खोलने को लेकर चर्चा की है।
कमर्शियल शिपिंग और ग्लोबल इम्पैक्ट
ईरान का यह साफ कहना है कि कमर्शियल जहाजों की आवाजाही तभी पूरी तरह सामान्य हो सकती है जब अमेरिका द्वारा लगाए गए नेवल नाकाबंदी और प्रतिबंध हटाए जाएं, उनके जमे हुए पैसों को रिलीज किया जाए और युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई की जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते का सीधा असर सऊदी अरब के एक्सपोर्ट, कतर के एलएनजी, यूएई की शिपिंग और खाड़ी देशों में अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर पड़ेगा। ओमान और ईरान के इस संयुक्त प्रस्ताव से अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करते हुए क्षेत्रीय समुद्री ट्रैफिक को मैनेज करने की दिशा में एक बड़ी उम्मीद जगी है।