Oman और Iran के विदेश मंत्रियों की बड़ी बैठक, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर हुई चर्चा.

Sushma Kumari23 August 20262 min read55 viewsOman
Oman और Iran के विदेश मंत्रियों की बड़ी बैठक, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर हुई चर्चा.

ओमान और ईरान के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और अहम समुद्री रास्तों को लेकर कूटनीतिक बातचीत तेज हो गई है। ओमान के विदेश मंत्री H.E. Sayyid Badr Al Busaidi और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को एक उच्च स्तरीय टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्र के ताजा हालातों पर चिंता जताई और आपसी बातचीत से मामलों को सुलझाने पर जोर दिया। इस पूरी बातचीत की जानकारी Oman Foreign Ministry की आधिकारिक वेबसाइट पर साझा की गई है।

होरमुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर खास जोर

दोनों देशों के मंत्रियों की बातचीत का मुख्य केंद्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा रहा। मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही को फिर से सामान्य बनाने के लिए व्यावहारिक कदम उठाने की जरूरत है। इस बारे में अधिक जानकारी Oman Foreign Ministry Updates से प्राप्त की जा सकती है। समुद्री यातायात सुचारू रूप से चलने से पूरे खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता बनी रहेगी और व्यापारिक गतिविधियों में कोई रुकावट नहीं आएगी।

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ओमान और ईरान के प्रतिनिधियों ने माना कि दोनों पक्षों को अपने विचारों और नीतियों में थोड़ा तालमेल बिठाना होगा। इससे सभी संबंधित पक्षों के हितों की रक्षा हो सकेगी और शांतिपूर्ण रास्ते निकलेंगे। ओमान की हमेशा से यह नीति रही है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करे और किसी भी तनाव को बातचीत के जरिए कम करने की कोशिश करे। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत से यात्रा करने वाले लोगों के लिए भी इन समुद्री रास्तों का सुरक्षित रहना बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे तेल आपूर्ति और बाजार के दाम प्रभावित होते हैं।

ईरान के सुरक्षा प्रमुख का बयान और आगे की योजना

इन कूटनीतिक प्रयासों से पहले, 23 अगस्त 2026 को सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के सुरक्षा प्रमुख Mohsen Rezaei ने संकेत दिया था कि इस जलडमरूमध्य के प्रशासन को लेकर बातचीत जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मार्ग को पूरी तरह खोलने के लिए अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को हटाना होगा और पारगमन शुल्क यानी ट्रांजिट फीस लागू करनी होगी।

इससे पहले हुई बैठकों में दोनों देशों ने एक संयुक्त कार्य समूह बनाने की संभावनाओं पर भी विचार किया था। इस समूह का काम इस समुद्री मार्ग के भविष्य के प्रशासन, सर्विस कॉस्ट और नियमों को तय करना होगा, ताकि दोनों तटीय देशों की संप्रभुता बनी रहे और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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