ओमान और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर हुआ समझौता, समुद्री रूट को लेकर बनी सहमति.

होरमुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz के जरिए जहाजों की आवाजाही को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। 5 अगस्त 2026 को ईरान ने यह जानकारी दी है कि उन्होंने ओमान के साथ मिलकर इस समुद्री रास्ते के लिए नए भौगोलिक निर्देशांक यानी geographic coordinates पर सहमति बना ली है। इस समझौते के बाद अब उम्मीद जगी है कि व्यापारिक जहाजों का रास्ता जल्द ही पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा। यह बातचीत पिछले कई हफ्तों से चल रही थी और अब इसे एक औपचारिक डील का रूप देने के लिए अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है।
समझौते का महत्व और चुनौतियां
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने इस विकास को एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया है कि केवल यह समझ ही काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि जलमार्ग की पूरी सुरक्षा तब तक संभव नहीं है जब तक कि अमेरिका अपने नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म नहीं करता और ईरानी बुनियादी ढांचे पर हमले बंद नहीं करता। ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi के अनुसार, अभी एक अस्थायी रूट पर बातचीत चल रही है जो दो से चार महीने तक सक्रिय रहेगा।
क्या है यात्रियों और व्यापार पर असर
इस अस्थाई योजना के तहत, जहाजों का एक बड़ा हिस्सा ईरानी समुद्री सीमा से होकर गुजरेगा। इसका मतलब यह है कि ओमान की ओर से निकलने वाले जहाजों को भी ईरान के साथ समन्वय करना होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इस प्रगति का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि यह समझौता जल्द ही पूर्ण रूप लेगा। हालांकि, अभी भी कुछ बड़े मुद्दे ऐसे हैं जिन पर खींचतान जारी है। इनमें सबसे मुख्य मुद्दा ट्रांजिट शुल्क यानी जहाजों के गुजरने पर लगने वाला टैक्स है।
- ईरान का प्रस्ताव: माल के मूल्य का 5% से 7% शुल्क।
- ओमान का प्रस्ताव: माल के मूल्य का 3% शुल्क।
- अमेरिका का रुख: किसी भी प्रकार के शुल्क के सख्त खिलाफ।
फिलहाल इस पर एक बीच का रास्ता निकाला जा रहा है, जिसे स्वैच्छिक भुगतान का नाम दिया जा सकता है। ओमान की तरफ पड़ने वाले समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगों को हटाने का काम भी इस समझौते का हिस्सा है। इस समझौते को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और परमाणु कार्यक्रमों पर बातचीत शुरू करने के लिए एक शुरुआती कदम के रूप में देखा जा रहा है। इस खबर की विस्तृत रिपोर्ट Al Jazeera द्वारा भी साझा की गई है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत से आने-जाने वाले कार्गो के लिए यह एक राहत भरी खबर है क्योंकि इस क्षेत्र में स्थिरता होने से ईंधन की कीमतों और सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ेगा।