Oman में फंसे तेल टैंकर को बचाने के लिए शाही वायु सेना ने शुरू की स्पेशल फ्लाइट्स, पर्यावरण बचाने की कोशिश जारी।

Nura Basta22 August 20262 min read65 viewsOman
Oman में फंसे तेल टैंकर को बचाने के लिए शाही वायु सेना ने शुरू की स्पेशल फ्लाइट्स, पर्यावरण बचाने की कोशिश जारी।

ओमान के समुद्र तट के पास फंसे एक बड़े तेल टैंकर को सुरक्षित निकालने और वहां के हालात पर नजर रखने के लिए ओमान की शाही वायु सेना ने बड़ा कदम उठाया है। Royal Air Force of Oman (RAFO) ने 22 August 2026 को कई विशेष उड़ानों की शुरुआत की है, ताकि दुर्घटना स्थल पर जरूरी सामान और विशेष टीमों को तुरंत पहुंचाया जा सके। यह पूरा अभियान देश के परिवहन मंत्रालय और पर्यावरण प्राधिकरण के साथ मिलकर चलाया जा रहा है ताकि किसी भी बड़े खतरे को समय रहते रोका जा सके।

कैरोलीन बेज़ेंगी टैंकर पर मंडरा रहा है संकट

यह पूरा मामला Caroline Bezengi नाम के एक बड़े तेल टैंकर से जुड़ा हुआ है, जो पिछले कुछ समय से ओमान के धोफार गवर्नर के पास अल-किब्लियाह द्वीप के नजदीक फंसा हुआ है। इस जहाज पर करीब 800,000 बैरल रूसी कच्चा तेल लदा हुआ है। इस साल 8 June 2026 को इस जहाज में एक संदिग्ध धमाका हुआ था, जिसके बाद से यह लगातार मुसीबत का सबब बना हुआ है। खराब मौसम और समुद्र की कठिन स्थिति के कारण बचाव कार्य में लगातार मुश्किलें आ रही हैं।

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बचाव अभियान में आ रही हैं भारी मुश्किलें

ओमान के परिवहन, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में समुद्री मामलों के महानिदेशक Mohammed bin Abdullah al-Rawahi ने बताया कि इस समय मानसून का मौसम चल रहा है और वहां का समुद्री इलाका काफी उथला और पथरीला है। इन सब वजहों से जहाज को बाहर निकालने के काम में बहुत ज्यादा जोखिम उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा, बचाव कार्य के लिए अनुबंधित ब्रिटिश कंपनी Ambrey के ग्लोबल रिस्पांस डायरेक्टर Ed Wollaston ने भी इस स्थिति को बेहद चुनौतीपूर्ण बताया है।

पर्यावरण को हुआ है नुकसान

ओमान के पर्यावरण प्राधिकरण द्वारा 10 August 2026 को जारी एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, तेल रिसाव के कारण लगभग 400 वर्ग किलोमीटर का इलाका प्रभावित हुआ है। इसके बाद 13-14 August 2026 के दौरान यह तेल बहकर रस मद्राका के तटों तक पहुंच गया, जो अल-किब्लियाह द्वीप से करीब 200 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। इस रिसाव से उस इलाके के 40 किलोमीटर तक के तटीय हिस्से पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। इसके अलावा मसीराह द्वीप के दक्षिणी समुद्र तटों पर भी इसका असर दिख सकता है।

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