Oman पर अमेरिका की कड़ी चेतावनी, स्ट्रेट ऑफ हार्मुज में रुकावट डाली तो होगी सैन्य कार्रवाई.

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ओमान को लेकर एक बड़ा और कड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर ओमान ने स्ट्रेट ऑफ हार्मुज को फिर से खोलने के प्रयासों में किसी भी तरह की रुकावट डाली, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा और कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और आम लोगों के साथ-साथ वहां रहने वाले प्रवासियों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
फॉक्स न्यूज के इंटरव्यू में दी चेतावनी
फॉक्स न्यूज को दिए गए एक इंटरव्यू के दौरान Donald Trump ने बहुत सख्त लहजे में बात की। उन्होंने कहा कि अगर ओमान बीच में आया तो अमेरिका उसे बख्शेगा नहीं। यह चेतावनी ऐसे समय पर आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच 60-day का समझौता यानी Memorandum of Understanding खत्म हो चुका है। इस समझौते की समय सीमा पूरी होने के बाद भी दोनों देशों के बीच शांति समझौता नहीं हो सका और रणनीतिक समुद्री रास्ते को खोलने को लेकर कोई ठोस रास्ता नहीं निकल पाया।
नौसेना की नाकेबंदी और सीक्रेट बातचीत
इस पूरे इलाके में इस समय भारी तनाव बना हुआ है। अमेरिकी नौसेना ने इस इलाके में नाकेबंदी कर रखी है। इसके साथ ही अमेरिका की तरफ से ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ सीक्रेट बैकचैनल के जरिए सीधी बातचीत भी चल रही है। ओमान हमेशा से एक शांत और तटस्थ देश की भूमिका निभाता आया है और उसने तेहरान के साथ इस समुद्री रास्ते के मैनेजमेंट को लेकर बातचीत भी की थी। लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने किसी भी ऐसे समझौते से साफ इनकार कर दिया है जिसमें ईरान को इस रास्ते पर अधिकार मिले या वह किसी भी तरह का ट्रांजिट फीस वसूल सके।
परमाणु हथियार रोकने का मुख्य उद्देश्य
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी साफ कर दिया है कि इस विवाद को खत्म करने के लिए अभी तक कोई भी पक्की तारीख तय नहीं की गई है। उनका मुख्य मकसद केवल ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है। ओमान को लेकर अमेरिका का यह रुख नया नहीं है। इससे पहले भी May 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया था कि ओमान को बाकी सभी देशों की तरह नियमों का पालन करना होगा, वरना उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। पिछले 24 hours में इस समुद्री रास्ते से एक भी कमर्शियल जहाज नहीं गुजरा है, जिससे स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई है। बातचीत की समयसीमा खत्म होने के बाद अब इस पूरे मामले में बड़ा तनाव पैदा हो गया है, क्योंकि अमेरिका इस जरूरी एनर्जी ट्रांजिट रूट पर अपना पूरा नियंत्रण बनाए रखना चाहता है।