OPEC+ की चेतावनी: ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले से बढ़ सकती है महंगाई, तेल सप्लाई पर पड़ेगा बुरा असर

ओपेक प्लस (OPEC+) की जॉइंट मिनिस्टीरियल मॉनिटरिंग कमेटी (JMMC) ने हाल ही में ऊर्जा संयंत्रों पर हो रहे हमलों को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है। 2 अगस्त 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई 67वीं बैठक में कमेटी ने साफ कहा कि तेल और ऊर्जा से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचने से न केवल उनकी मरम्मत में लंबा समय लगता है, बल्कि यह बहुत महंगा भी साबित होता है। इसका सीधा असर दुनिया भर में तेल की सप्लाई और उसकी उपलब्धता पर पड़ता है।
सप्लाई में बाधा से बाजार में बढ़ेगी अस्थिरता
कमेटी के मुताबिक, समुद्री रास्तों या ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर में किसी भी तरह की रुकावट से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता पैदा होती है। इससे उन सामूहिक प्रयासों को भी झटका लगता है जो ऊर्जा बाजारों में स्थिरता बनाए रखने के लिए किए जाते हैं। सदस्य देशों ने समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि ऊर्जा की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करना सबसे जरूरी काम है।
तेल उत्पादन में कटौती का फैसला
बैठक में मई और जून 2026 के क्रूड ऑयल प्रोडक्शन डेटा की समीक्षा की गई और सदस्य देशों द्वारा उत्पादन कम करने के समझौतों पर चर्चा हुई। इसी दिन सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने मिलकर 188 हजार बैरल प्रति दिन तक उत्पादन में कटौती करने का फैसला लिया है। यह फैसला सितंबर 2026 से लागू होगा। ओपेक प्लस की अगली 68वीं बैठक 4 अक्टूबर 2026 को होगी। इस बारे में अधिक जानकारी आप OPEC की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।